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कमाल जी अभिव्यक्ति की आज़ादी को शायद आपने गाली देने की आज़ादी समझा तभी तो कन्हैया के भाषण जिसमे न्यायपालिका के आदेशों की धज्जी उड़ाई गई ,न्यायपालिका का अपमान किया गया ,प्रधान मंत्री को गालियां दी गयी ,रोहित को अपना आदर्श बताया गया जो याक़ूब जैसे आतंकवादी का सहयोगी था ,देशविरोधी नारा लगाने वालो के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोला गया ,आरोपी जिनके खिलाफ वारंट है जो जेएनयू मे निवास कर रहे के बारे मे कुछ नहीं कहा गया और यह भी नहीं बताया गया की 09 फरवरी को जेएनयू प्रशाशन पर दबाव बना कर अफजल की मौत का उत्सव क्यूँ बनाया गया । आप फिल्मी दुनिया से जुड़े है पर हिंदुस्तान का अपमान करने वाले को इनाम देना आपकी गंदी एवं घृडित सोच को दर्शाता है -कम से कम जिस देश का आप खा रहे हो उसका तो ख्याल करो-उसे तो इज्ज़त दो

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Srimaan Kejriwal Mahodaya, Date- 18 Dec.2015 Hamare Taraf se ek Sujav hai jo hamare question Achche lagenge, Jo aapke Delhi ke Authority hai. Un sab se jitne v Gaadi Registered hai , Un Two wheeler,Three wheeler,Four wheeler aur truck un sab ka gaadi no. jis jis aadmi k naam se registered huye hai. un sabka details k saath two mobile no. customer care se judege, ek personal no. aur ek ghar ka no. ya bhai ka no.ho.Un sab no. ko aur registered no. ko saari jimmedari se saare mobile no. company ko diya jaye aur us mobile company apne system me daale aur jitne v gaadi registered huye hai. Un sab ka kanoon k saath kanoon k Dayre me laya jaya aur teen mahine ka pollution aur Insurance saal me ek baar hote hai. In dono sab ko mobile company k jariyeb messege 1 to 5 date tak Alert karein. Nahi karne per har gaadi bale se daily Rs. 50 jurmana karein. Ye jimmedari isiliye hote hai taki Delhi ka system sudhar sake aur Log apne jimmedari samay per Nibhaye. Aur ek system aur v diya jaye jo har gaadi par lagoo hoye, Har red light per CCTV camera lagaya jaye aur saath me Red Light k pas Chamber room banaya jaye taaki har harkat kin ajar rakha jaye aur system k saath gaadi ko Red light paar kahne ka adesh diya jaye. Isse Delhi ki system kafi sudhaar hogi. Saath me Divider ho usme Ghas, Paudhe lagaya jaye jisse Pollution ko dur kiya ja sake. Aur ek sujhav hai, saath me jo har gaadi me lagoo kiya jaye. Har gaadi se Rs. 200 se Rs. 300 Mahine recharge coupan ki tarah mile. Aur ek sujhav hai ki har person per ek hi gaadi Registered kiya jaye. Jitne v maine system likha hu isme har kisi ke pas kitne gaadi hai ye saari jankari milenge. Even or Odd number jo aap lagoo kar rahe hai isme Public k paresani ho sakti hai. Is niyam k liye Public ka khyal rakhe. Agar hamara sujhav aapko achcha pasand hai, inke alaba aur v system se jude mere pas sujhav hai.Agar aap chaye to mai bata sakta hu. Aap ka subhchintak, MD. SHAH ALAM, DELHI.

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don't be judgemental.... आरोप लगाना आसान होता है. गुरुओं का हिन्दू धर्म में बहुत महत्व है. मनुष्य में इतना विवेक होना चाहिए की की वो सही गुरु की पहचान कर सके. संत गुरमीत राम रहीम पे जितने भी आरोप लगे है उनमे खुद खुलासा हुआ है की वो सब एक षड़यंत्र था.जिसमे इक चैनल के पत्रकार ने ३० लाख रुपये में फ़साने का सौदा किया था. आपको पहले थोडा जान लेना चाहिए उनके बारे में जिनके बारे में आप लिख रहे हो. १०४ तरह के मानवता भलाई के कार्य डेरा साचा सौदा द्वारा चलाये जा रहे है. हिन्दुस्थान की तीनो सेनाओ; जल थल और वायु , को डेरा साचा सौदा ब्लड डोनेट करता है. वो केवल डेरा साचा सौदा से ही ब्लड लेके जाते है और कही से लेने की उन्हें जरुरत ही नहीं पड़ती. ११ मानवता भलाई के वर्ल्ड रिकॉर्ड डेरा साचा सौदा के नाम है. जिनमे ब्लड डोनेशन, पौधा रोपण इत्यादि | पर आप लोगो को वो सब दिखाने के पैसे नहीं मिलते |

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संत गुरमीत राम रहीम जी एक सचे संत है. जिन्होंने कभी भी कोई गलत काम नहीं किया. इस लेख के लेखक को थोड़ी सी परिपक्वता दिखानी चाहिए और जिस किसी के बारे में भी लिखे उससे पहले थोडा होमवर्क कर लेना चाहिए. १०४ प्रकार के सामाजिक भलाई के कार्य डेरा साचा सौदा में चल रहे है. १० वेश्याओ की शादी करके उन्हें समाज की मुख्या धारा में लाया जा चूका है. भ्रूण हत्या, नशाखोरी आदि बुराईयों से करोड़ो लोगो को निकाला जा चूका है. जो सफाई अभियान अब हमारे प्रधानमंत्री जी चला रहे ,संत जी ने २०११ से चलाया हुआ है और अब तक २८ शहर में सफाई करके लोगो को जागरूक किया जा चूका है. मुझे अफ़सोस है इस तरह के पत्रकार कुछ पैसे कमाने के चक्कर में जो मन में आया किसी के बारे में भी कुछ भी छाप देते है.और मुर्ख हिन्दू इनकी बातो में आ जाते है. धिक्कार है ऐसे लोगो पे.

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जय श्रीराम लेखक सड़े पूछना चाहता हूँ की केवल हिनदु गुरुओ के ऊपर आरोप क्यों लगते क्यों कोई मौलवी या पादरी का नाम नहीं आया.ईसाई मिशनरीज धन बल के सहारे आदिवशिओ और गरीब लोगो का धर्मपरिवर्तन करते है, हिनदु भगवन के बारे में उत पतंग बाते करते है बापू आसारामजी ने इनकी पोल खोली तो मिशनरीज ने फसा दिया और सोनिया गाँधी इस मामले में उनकी मदद करते है.इसी तरह कृपालुजी पर बलात्कार का आरोप और जयंत सरसवती पर हत्या का आरोप लगा जो गलत साबित हुआ.हमारा मीडिया कभी सही खबर नहीं दिखता.कभी ये क्यों नहीं दिखता की आसारामजी ने कितना कार्य गरीबो और आदिवासिओं के लिया किया और उनके पक्ष में कितने प्रदर्शन हो रहे हैं.एक तरफ़ा बात नहीं चलती.

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अगर सरकार के द्वारा इस तरह के धन को और भी मंदिरो मस्जिदों गुरुद्वारों से निकालकर देश के विकाश और गरीबों की भलाई के लिए लगाया जाये तो यह अच्छी बात होगी लेकिन नियत का साफ़ होना बेहद ज़रूरी है इन मंदिरों मस्जिदों में पड़ी रकम ईश्वर एवं अल्लाह तथा वाहेगुरु के आशीर्वाद हैं इन संपत्ति का सबसे सही इस्तेमाल देश की प्रगति में इन्हे लगाना होगा इस संपत्ति पर देश के प्रत्येक नागरिक का बराबर हक़ हैं जिस देश के गरीब नागरिक भूखे पेट सोने को मजबूर हों और देश के किसी कोने में इतना धन व्यर्थ पड़ा धूल फांक रहा हो उस देश में परिवर्तन कैसे आएगा ज़रुरत है वक़्त की नजाकत को पहचानने की क्योंकि जब देश रहेगा तभी धर्म रहेगा तभी हम लोग रहेंगे मंदिर मस्जिद के ठेकेदारों को यह समझना चाहिए की ईश्वर के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धा तभी सफल है जब हमारी आराधना इन्शानियत के काम आये ये बहुमूल्य सम्पदा ईश्वर की हमारी आराधना का आशीर्वाद है जो की इन्शानियत के काम आणि चाहिए न की कुछ चंद धर्म के ठेकेदारों के यही हमारी ईश्वर के प्रति सच्ची पूजा और श्रद्धा होगी जय हिन्द जय भारत

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उस परिवार को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए जिसने यह सब कूकर्म किया बेटी किसी की भी हो पर है तो इंसान और इंसान को मरने वाले को शरे आम गोली मार देनी चाहिए। और अगर उस लड़की ने आत्म हत्या की है तो सबसे बड़ी अपराधी वो खुद है जो लड़ने के बजाए कमजोर पड़ कर अपना अपने माँ बाप का और नारी शक्ति का अपमान कर गई। इंसान को जीवन में लड़ना चाहिए जिससे औरों को राह मिले। लोग इसका इल्जाम प्रेम विवाह पर लगाते हैं पर प्रेम विवाह समस्या नहीं यह सब अर्रेंज शादियों में ज्यादा होता है कहीं दहेज़ या कहीं एक दूसरे को समझना नहीं। इसी में कामिनी बहिन ने कहा जैसे की कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए हम भी येही मांग करेंगे। पर इसका सर कुचलना जरूरी है जिससे आगे ऐसा सब न हो किसी के साथ। अब इसके लिए अलग कानून बनाने के लिए कोई फ़ायदा नहीं क्यों की उसका फ़ायदा लड़कियां भी लेती है झूठ बोल कर। इसका सबसे आसान तरीका है की जो गलत करे या जो झूठ बोल कर किसी को फसाए दोनों हालतों में उस इंसान को गोली मार देनी चाहिए बीच चौराहे। एक दो के बाद सब ठीक होने लगेगा। और सबसे बड़ी बात रिपोर्ट करवाने के लिए कोई पुलिस स्टेशन नहीं बल्कि अलग से सेल होना चाहिए जिसमे लड़कों लड़कियों दोनों की बराबर सुनी जाये क्यों की आज कल लड़कियां भी बहुत ख़राब हो चुकी है झूठ लूट और बदचलन आने लगा है। और एक विनय है सब परिवारों से अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दें उन्हें औरत मर्द का सन्मान करना सिखाएं और चरित्र निर्माण जरूर सिखाएं। इन विदेशी लाइफ स्टाइल ने हमारा कल्चर ख़तम कर दिया है यह नहीं की प्रेम विवाह हमारे समाज में नहीं था इन बाहर वालों से पहले से है पर हम्मारे में संस्कार, सलीलता, सन्मान, सच्चाई हुआ करती थी जो इन कल्चर ने ख़तम कर दी। आज प्रेम विवाह को गलत समझा जाता है। कारण वही बदलते संस्कार। देश को परिवार को मजबूत बनाना है तो संस्कार अच्छे दें। और नारी का सन्मान न करने वाले को गोली मारनी चाहिए और ऐसा ही पुरुष का सन्मान न करने पर भी। जब सब बराबर होगा और सजा का डर होगा तो कोई गलत करने की कोशिश भी नहीं करेगा। वन्दे मातरम । जय नर नारी।

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मई सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से संतुष्ट नहीं हूँ. क्यूंकि मतदाता धूप लू कि परेशानियों को झेलते हुए भी अपने वोट के अधिकार का प्रयोग करने बूथ तक जा रहा है फिर भी अपने वोट का सही इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है . इस से तो अच्छा होगा कि वो अपने घर बैठे. जब उसके वोट कि कोई क़ीमत ही नहीं है तो परेशानी झेलने से क्या फायदा. इससे तो यह होगा कि ९९ प्रतिशत जनता का नकारा हुआ प्रत्याशी १ प्रतिशत वोट लेकर ९९ प्रतिशत जनता पर राज करेगा.. लोकतंत्र का कोई मतलब ही नहीं रह जाएगा....आशा है कि सुप्रीम कोर्ट आने वाले समय में जनता कि इस कलह को संज्ञान में लेते आवश्यक और कठोर कदम उठाएगी . मई म० न्यायालय का सम्मान करता हूँ.. जय हिन्द .

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आज जितनी मस्जिद है उसकी अगर जाँच हो तो लगभग सभी मस्जिदों में हथियार,बम बहुत सारे हथियार बरामद हो सकते है लकिन न सरकार की औकात है और न ही पुलीस की औकात है जो इमानदार है जो सीधे साढ़े सरल हिदू संत है उन को ही सताया जाता रहा है,कबीर,गुरुनानक ,बुद्ध ,मंसूर रामकृष्ण ,रामसुखदास जी ,और न जाने कितने हिन्दू संतो को सताया जा रहा है हिन्दू आखिर कब तक अपने संतो के सताने का तमाशा देखते रहेंगे....... आप अलग क्यों होते जा रहे है?सच्चाई को क्यों नहीं समझ रहे है कभी आप विचार करते है आखिर रोज हिन्दू संतो को ही क्यों दिखाते है.....पादरी लोग इतने भोगी होते है की छोटी छोटी बच्चियों के साथ कुकर्म करते है....ऐसे ही विदेश में भोगी इसाई रहते उनसे आप प्रभावित हो जाते है क्यों ?क्योकि आप अपने धर्मं के बारे में जानने की कोशिस नहीं की......हमारा हिन्दू धर्मं ऐसा कोई धर्मं ही नहीं है......

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दिन भर एक ही न्यूज़ आज मीडिया का मान धीरे धीरे गिर रहा है मीडिया आज कल टी आर पी के लिए कुछ भी करने को तयार है न्यूज़ कम है और न्यूज़ चैनल अधिक है जिसके कारन जो खबर नहीं है उसमे मिर्च मसाला डालकर खबर बनाया जा रहा है पिछले कुछ महीनो से आसाराम बापू के मसले पर स्टूडियो के अन्दर ४-५ घंटे और तमाम जटाधारी बाबाओ स्य्कोलोगिस्ट और सेक्सोलोगिस्ट को बुला बुला कर जिस तरह से चर्चा किया जा रहा है क्या सबसे बड़ी देश का यही न्यूज़ है? क्या सेक्स को बेचने की कोशिश नहीं किया जा रहा है?क्या मीडिया ,टीवी चैनल इसके लिए अभिसप्त नहीं है क्या वे भयंकर गलती नहीं कर रहे है ?---आशुतोष आई बी एन7 टी आर पी ही मीडिया का सबसे बड़ा रोग है टी आर पी से ही से ही तय है चैनल को मिलने वाले विज्ञापन की कीमत जितनी रेटिंग उसी अनुपात में पैसा.....कुछ चैनल तो खबर से तौबा ही कर ली है जितनी सनसनीखेज विडियो उतनी अधिक रेटिंग ऐसी मान्यता बनी है अब बापूजी के करोडो भक्त है तो टूट पड़े टी आर पी के भूखी मीडिया और जो मन में आये उसको दिखाया जा रहा है मीडिया पर जरुर लगाम रहना चाहिए

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सावधान , "परम पूज्य आशाराम बापूजी द्वारा सामजिक, राष्ट्रीय और आध्यात्मिक स्तरों पर जो सेवा कार्य किया जा रहा है उससे सबसे बड़ा नुक्सान कुछ अंतर्राष्ट्रीय कम्पनियों और क्रिश्चियन मिशनरियों को होता है l इसलिए ,उन्हें बदनाम किया जाना एक अंतर्राष्ट्रीय षड्यंत्र है l हर व्यक्ति को अपने दिमाग का इस्तेमाल करना चाहिए कि जो संत इतने बड़े स्तर पर सेवा कार्य कर रहे हैं क्या वो कभी रेप जैसा घिनोना काम करके अपने चरित्र को अपवित्र करेंगे ?"  पूरे विश्व में पूज्य बापूजी के जो 4 करोड़ से भी अधिक साधक हैं वे सब कोई अनपढ़ या गंवार लोग नहीं बल्कि उनमें कई वैज्ञानिक , इंजीनियर , डॉक्टर , वकील , सरकारी मुलाज़िम , व्यापारी और अन्य कई पेशों के लोग शामिल हैं l विश्व का कोई भी व्यक्ति इतने लोगों को केवल धर्म और आस्था के नाम पर बेवक़ूफ़ नहीं बना सकताl

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आजकल दिल्ली सहित 6 राज्यो में चुनावी सरगर्मी चल रही हैI यही नहीं जब से यह सब चालू हुआ है सभी राज्यो में विभिन्न दलो के प्रत्याशी अपनी अपनी रणनीति से मतदाताओ को लुभाने लगे है.विभिन्न राज्यो मे अलग अलग मुददो पर चुनावी रण लड़ा जा रहा है I मै आप सभी मतदाताओ से अनुरोध करता हूँ कि अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करें एवं केवल यह धारणा न रखें कि यदि मैने मतदान नहीं किया तो कोई फर्क नहीं पड़ता I एक बात का धयान रखें यदि आप प्रजातंत्र के इस बहुमूल्य अधिकार का प्रयोग नहीं करते तो आप स्वयं ही अपने आप को तथा अपनी अनदेखी के कारण अन्य सभी को एक अच्छी सरकारी प्रणाली से वंचित करने का कारण बनते है I यही नहीं केवल मतदान आवश्यक नहीं उसका सही प्रयोग भी अत्यंत आवश्यक है इसलिए यदि आप यह निर्णय नहीं ले पा रहें है कि किसको मतदान करें तो निम्नलिखित मापदंडों पर आप अपने पसंदीदा प्रत्याशी को परखे 1. क्या प्रत्याशी अपने पद के लिए जरुरी योग्यता रखता है ? 2. क्या वह पद पर आने पर सुचारु रूप से कार्य करने के लिए सक्षम है ? 3. क्या प्रत्याशी में इस पद को वहन करने के लिए न्यून्तम शैक्षिक योग्यताएं है ? 4. क्या जिस पद के लिए आप उसे अपना प्रतिनिधि बनाना चाहते है ,वह उसका भार उठाने योग्य है ? 5. क्या वह आपकी तथा आपके क्षेत्र कि समस्याओ का उचित निपटान कर पायेगा ? 6. जो प्रतयाशी वोट मांगने कई बार आपके दरवाजे पर आता है तो क्या पदभार प्राप्त करने पर वह आपके प्रति वही दृष्टिकोण बनाये रखेगा ? 7. यदि कोई प्रत्याशी पहले ही इस पद पर आप ही के क्षेत्र से रहे है तो आपके क्षेत्र में क्या वह नियमित रूप से आते रहे ? 8. यदि किसी कारणवश वह नहीं आ पाये तो क्या अपने दल एवं तंत्र प्रणाली से आपके क्षेत्र कि समस्याओ का निपटान सक्रिय रूप से करते रहें ? 9. क्या आपका पसंदीदा प्रत्याशी निष्ठावान एवं सही आचरण को धारण करता है ? 10. क्या उसे पद प्राप्त होने पर अपराध तथा भय का वातावरण तो नहीं बनेगा ? 11. क्या आपका प्रत्याशी सेवा भावना को दर्शाता है ? 12. आप अपने प्रतिनिधी से स्वंत्र रूप से संपर्क कर पाते है तथा पद पर आसीन होने के बाद क्या यह संभव होगा ? 13. क्या प्रतयाशी चुने जाने के लिए अमर्यादीत तरीको का प्रयोग कर रहा है ? 14. क्या प्रतयाशी अपने द्वारा किये जा रहे वादो को पूरा करने हेतु निष्ठावान प्रतीत होता है? 15. वह आपकी समस्याओ में सहभागी बनने को आतुर प्रतीत होता है ? 16. प्रत्याशी के चुने जाने पर वे आपको नजरअंदाज तो नहीं करेंगे ? 17. कही आप उसको मतदान बिना विचारे तो नहीं कर रहे? 18. आपके प्रत्याशी कि पूरी जानकारी का आपने अध्यन किया है ? 19. आप किसी अल्पकालिक प्रलोभन के लिए तो उसे मतदान नहीं कर रहे ? 20. क्या आप किसी प्रत्याशी के अयोग्य होने पर भी उसे भावनावश मतदान कर रहे है ? पहले तो मतदान करना बहुत ही अनिवार्य है अत मतदान अवश्य करें,केवल मतदान ही नहीं एक सही,सभ्य ,योग्य ,शिक्षित तथा सेवा के लिए तत्पर प्रतयाशी को चिंतन करे और उसे ही मतदान करें I यह आपकी नैतिक जिम्मेदारी है ,क्योंकि आपका गलत मतदान अथवा मतदान न करना आपके लिए ,आपके क्षेत्र के लिए और इस प्रजातंत्र प्रणाली के लिए बहुत बड़ा खतरा है I इसे आप बचा सकते है I इस लेख को पढ़ने वालो से अनुरोध कि प्रण करें कि हम मतदान करेंगें एवं औरों को भी इस मताधिकार के सही प्रयोग के लिए प्रेरित करेंगें I

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आज हमारी लोक सभा ओर विधान सभा मे दागी उमीदवारो कि भरमार हे ओर जनता के पास मतदान का अधिकार होते हुवे भी मतदाता बेबस थी उन्हे पार्टी के दवारा खडॆ कीये गये पर्तियासियो मे ही किसी एक को मजबुरी वंस चुन्ना पड्ता था कयोकी जन्ता पार्टी के साथ जुडी होती हे / मगर अब अब सुप्रिम कोर्ट ने एक ऎतिहासिक फ़ेस्ला दिया हे जिस पर पुरे भारतिय मतदाताओ को गर्व हे / अब जन्ता पर पर्तियासी थोपा नही जा सकेगा कयोकी इस बार एक एसा पर्तियासी भी मेदान मे उतरने वाला हे जो इन थोपे गये पर्तियासीयो कि वाट लगादेगा ओर यह होगा मुझॆ कोई पसन्द नही का बटन जो सभी का एक झटके मे फ़ेसला कर देगा अगर माननिये सुप्रिम कोर्ट के राईट टू रिजेक्ट मे यह प्रावधान भी रखा जाता कि पचास % से अधिक मतदाता अगर इस अधिकार का उपयोग अपने क्षेत्र में करते है तो उस क्षेत्र का चुनाव रद्द कर दिया जायेगा तो इसके ओर भी सार्थक परिणाम सामने आते तथा यह अधिकार नकारात्मक वोटिंग से सकारात्मक वोटिंग में तब्दील हो जाता अब यह नकारात्मक वोटिंग के रूप में ही सामने आयेगा कयोकि पचास % से अधिक मतदाता कही भी इस बटन का इस्तेमल नही करेगे ओर चुनाव मे खडे पर्तियसियो को कोइ फ़र्क नहि पडेगा सिर्फ़ होगा इतना कि पहले लोग वोट डालने जाते नही थे अब वो जायेगे ओर यह बटन दबायेगे फ़िर भी चुनाव मे खडे लोग अपने पक्ष में हुई 60 पर्तिसत वोटीग से ही जित जायेगे जय भगवान सिंह कादयान       अद्यक्स          जननायक चोधरी देवीलाल ग्राम सुधार सगठन डन्डूर             मो० नंबर 999255534             jaibhagwansinghkadyan@yahoo.com

के द्वारा: laxmikadyan laxmikadyan

राम जेठमलानी और A P सिंह के बयां पर इतना होहल्ला मैं लाजमी नहीं मानता ये दोनों ने तो जनता को उस सच्चाई से अवगत कराया है जो की हमारे समाज को barso से दीमक की तरह खाए जा रही है जो की आज मीडिया पर इस केस के आ जाने के बाद हमें SPASHT NAJAR आ रही है येही समाज का वो सम्मानित वर्ग है जो इन अपराधियों को बचत रहा है तथा पलता रहा है फर्क सिर्फ इन है की इस सच्चाई से अज तक हम मूंह मोदते रहे जब पानी सर तक आ गया है देश में हर जगह अपराध और BALATKAR SUNAI DE रहे हैं तो हमें बुरा लग रहा है असल में अपराधी तो ये सम्मानित वर्ग है आज अपराधी को अपने को बेगुनाह साबित करने में उतनी म्हणत नहीं करनी पड़ती जितनी की पीड़ित को यह साबित करने में की उसके साथ अपराध हुआ है राम जेठमलानी तो उस ग्लेशियर का टुकड़ा मात्र है जो हमें दिखाई de गया वर्ना यहाँ तो poori दल ही काली है यह केस ही साबित करता है की पीड़ित को ही किस तेरह बार बार जलील होना पड़ता है तथा बचाव पक्ष जो की सम्मानित समाज का सदस्य माना जाता है किस हद तक गिर सकता है

के द्वारा: deepakbijnory deepakbijnory

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 विदेशी वातावरण मै पली,,, एक साधारण महिला ने  आज दुनियां की सशक्त महिलाऔ मै स्थान  ही नहीं     बनाया भारत की राजनीति ,कांग्रेस पार्टीको सशक्त रूप सॆ स्थापित करने वाली महिला आज अगर किसी कारणवस  चक्कर खाने के कारण असपताल मै भरती होती है और उसे शिष्टाचारवस य़ा सहानुभूतीवस  अस्पताल मै हाल चाल पूछने जाना एक साधारण शिष्रटाचार ही नही वरन एक कर्तव्य भी है एक ऐसी महिला जो कांग्रेस पार्टी का पूर्ण आघार है जिसके विना कांग्रॆस पार्टी विखर सकती है भरत को स्थिर सरकारें देकर स्थिरता देकर एक अच्छी साख प्रदान की ,,,,,,,,,,,,,अफसोस होता है ऐसी महिला को साधारण  कर्तव्य को भी राजनितीका मुद्दा बना रहे हो य़ह समय सहानुभूती का ही होता है,,,,,,,यह समय साधारणतः संयम का होता है ,,,,,,,,,,,भगवान ऐसी महिला जल्दी स्वास्थ लाथ दे जिससे वो भारतिया ऱाजनीति को आधार देती रहे ,,,,,अपने लिए तो उसने कुछ नहीं चाहा         ओम ,,,,,,शांति ,,,,शांति ,,,,शांति ,,,,,,

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

राजनेता ,राजनैतिक पार्टीयां, ना हिंदु होती हैं ना मुसलमान ना सिख ना ईसाई या अन्य धार्मिक या किसी सम्प्रदाय विशेष की,,,,,,,यह भावनाऔ की खिलाडी ही होती हैं ,,,,शतरंज की विसात पर मोहरौ की सी औकात ही होती है हम आम जनता की ,,,,कब किस को दांव पर लगाकर सह या मात की कोशीस की जाती रही है,,,बाजी जीतना यानी स्रत्ता हासिल करना ही मुख्रय उद्देश्य होता है उसके लिए किसी भी वस्तु ,नैतिकता ,संस्कार या धर्म आदि की बली दी जाती है किसी भी  पशु  पक्षी या अन्य जीव जैसी ही स्तिथी रह जाती है आम जन मानस की,,,,    भावनाऔं से ऐसे निरीहता से खेला जाताहै जैसे भेड बकरियां हौं जहां चाहो वहां हांक दो ,,,,,,,,हम यह सब कुछ जानते समक्षते हुए भी किसी सम्मोहित व्यक्ति के समान वैसा करते जाते हैं जैसा वह चाहती हैं    ,,,,,,    ,,,,लेकिन         याद   करो,,,,,,,          हर राजैतिक सुख भोग चूके नेता का ,,,,,अंत ,,,,,और सॆभल जाओ ,,,,,,,,,,सत्ता मिली तो कुछ ही दिन सालों को गाली खाते खिलाते ही बिताओगे ,,,,,,,,वरना आम जन मैं विलीन हो मोहरौ की तरह ही वलिदान हो जाओगे,,,,,,,,,क्यौ अपनी नैतिकता संस्रकार बलिदान कर रहे हो ,,,,,,,,,,,,,,हम तो यही मनन कर सकते हैं ,,,,,,,,,,,,,,,,,ओम,,,,, शांति,,, शांति,,,, शांति ,,,,,

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के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

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भावी प्रधानमंत्री की छवी बन रही है         ,,,,,,,,,,,,              ऱावर्ट  वाड्रा  मैं     ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,एक  चर्चित  व्यक्ति ऱाजनीति मैं एक उॅचाई हासिल करता है  क्या इंद्रा गांधि का विगाड पाया विपक्ष वह स्वयं मजबूत होते हुए काग्रेस को एक मजबूत आधार स्तंभ प्रदान कर गइ  जितना विपक्ष इस मामले को उछालेगा उतना ही मीडिया उसे दुगने जोर से उछालेगा  सिद्ध कुछ नहीं कर सकोगे ,,करभी दिया तो एक व्यक्ति से एक,,,,,    हस्ति ,,   का उदय हो जायेगा जो भविष्रय का राजनेता देगी    और काँग्रेस को एक नया स्तंभ ,,,,,,,, जितना ऱंग डालोगे ऱंगे विपक्षभी रंगा जायेगा यही राजनीति है ,,,,यह धर्म की विलोम होती है ज्यादा मत सोचो यही  विचार करो           ,,,,,,,,,, ओम ,,शांति ,,शांति ,,,शांति,,, 

के द्वारा: hcsharma hcsharma

यह राजनीति है  ,   एक युद्ध का  आगाज  , की-----  ,,,,यह उद्देग मैं लिया गया   या,,,,,, अचानक होने वाली घटना नही है ,,,,,,यह    कुटनीतिक चाल है  जहां अपने देश के आतंकवादीयौं का ध्यान वँटाने का काम करेगा     वहीं ,,,,,,,,अमेरिका द्वारा पड रहे दबाब को कम हांककर अपने मित्र वने चीन को खुश करना होगा,,,,,,,,,नवाज शरीफ का,,,,और अपनी कुशल प्रशासक होने का डंका गाढ देगा नवाज शरीफ  ।.,,,,,,,,,.भारत मै जहां समाजवादी पार्टी  मुसलमानों को अपने आधिपत्य मैं करने के लिए कुछ भ करने को तैय्यार है  ,,,,, कांग्रेस को मजबूरन शांत रहना पडेगा  लोक सभा चुनाव को मद्देनजर रखकर ,,,,,,,,  वाह रे कुर्सी तु जो ना करवा दे    हो सकता है  ,,, युद्ध   ,,, एक और कारगिल जैसा  ,,,,,,, चीन का सीमाओ पर छेडखानी ,,,,,, नवाज शरीफ का प्रधानमंत्री बनते ही चीन का दौरा ,,,,,,और  अब  अमेरिका का  अपने दूतावास को खाली करने का आदेश देना अमेरिकियो को पाकिस्तान ना जाने या वहां से वापस आने को कहना  ।.,,,,दबाब डालकर अपनी मंसा पुरी करवाकर  भी शायद ना निपट पायेगा    ,,,, शायद ,,,,ग्रह स्तिथी भी यही कह रही है ,,,,यही कहा जा सकता है  ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, ओम ,,,  शांति --  शांति ---  शांति  ,,,,,,,,,,,,,,

के द्वारा: hcsharma hcsharma

शहीदों की शहादत को धक्का --------शायद यह नैतिक सच है जिन भावनाओ को भरकर उनसे सेवा ली जाती है उनमैं जोश व उत्साह  भरा जाता है वह धरासाई हो जाता है वास्तव मैं हम सैनिकौं की भावनात्मक रुप से ही सेवा लेते हैं यह 25 प्रतिशत ही है 75 प्रतिशत गरीबी लाचारी ही होती है जो फौज  मैं जाने को मजबुर करती है यह एक कटु सत्य ही है कि फौज या सशत्र सेना यानी यूद्ध यानी मरना या मारना यही सोचकर ही सेना मैं भर्ती होते हैं  लेकिन कोई सत्य जानते हूए भी नहीं बोला जा सकता है वह ऎसी दूखद क्षण मैं ,,,,, यही उपहास का कारण बना ,,,,, वास्तव मै,,,दिवंगत शहीदों आत्मा की शांति के लिए व अन्य  वीर सिपाहिय़ौ को उत्साहित करने के लिए ,,सम्मानित करने केलिए ,,बोलना चाहिए ,,, एक समझदार खासतौर से नेता से संयम की उम्मीद करनी चाहिए ,,खासतौर से उस यूग मै जब मीडिया अपने संसाधनों मैं चरम पर है---------   ---------------------ओम   शांति   शांति   शांति,,,,,,

के द्वारा: hcsharma hcsharma

भारत की कोख से निकलने को तैय्यार तैलंगाना  क्या गरीबों का विकास कर सकेगा  या गरीबी का विकास करेगा  नये राज्य नये मुख्यमंत्री नये मंत्री नये शासक नये प्रसासक ईस तरह एक उच्च प्रशासक वर्ग का ही विकास होगा नये नये गवर्रनर वडैंगे गरीब जन का ना विकास हुआ है ना हो पायेगा राजनीतिक फायदा उठाती पारर्टीयां अवष्य आयैंगी अन्य कमजोर पैदा राज्यौं की तरह  विलखता यह राज्य भी नजर आयेगा गरीबी पहले की तरह विलखती ही नजर आयेगी ,,,,,,अन्य गर्भवती राज्यों से निकलने को तैयार बच्चा राज्य भी राजनीतिक दलों व राजनीतिज्ञोंका ही पोसक होंगे,,,,22 गर्भ मैं पल रहे बच्चा राज्य बाहर आने को हाथ पैर मारने लगे हैं उनको पैदाकर राजनीतिज्ञ अपना अपना स्वार्थ सिद्ध करने को तैयार होने लगे हैं और एक कुसल प्रसासनिक दल  पुनः सत्तारूढ होने के लिए कुसल चाल चल चुका है जनता, विपक्षी दल, क्षोत्रीय जाति  वर्ग  भाषी मूल के अन्य लोग भ्रमित होकर विखरैंगे और पुनः सत्तारूढ होने की संभ्भावनाऔं को जगायेगा क्या कुसल राजनीति है, ,,,,,,,,,,,,,,,,,,दूसरी ओर खाद्य सुरक्षा अधिनियम  लाकर गरीबों लालच दिया गया है मॅहगाई बडाने के लिए ब्याज दर ना घटाकर रूपये के अवमूल्यन होने दिया जा रहा है गरीबों को और गरीबी की ओर धकेलकर उनको एक अनुसासित शोषित रहने दिया जायगा यह सच है कि हम पांच रूपये मैं एक थाली ही नहीं पुरे परिवार को खिलाते हैं यह सच राजनीतिज्ञों न बखान  किया है और यह पुर्णतः सत्य है पांच रूपये मै 250 ग्राम आटा लाकर हम  सपरिवार नमक के साथ खा सकते हैं दस रूपये मै दो वक्त का खाना ,बचे 22ऱूपये तो बहूत हैं,,   वहीं मिड डे मिल बदनाम हो ही रही है  राजनीतिक चालों से आहत जनता समाचार सुन कर उस पर टिप्पणीं करते हुए बहस करती नजर आयेगी ,,,,,,,,,सासक या असासक राजनीतिज्ञ कोई भी हो विकास करेगा नई ऩई चालों का 

के द्वारा: hcsharma hcsharma

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के द्वारा: harirawat harirawat

संजय दत, और श्री संत को एक प्लेट फ़ार्म पर लाकर देश की जनता को दिखा दिया है बुराई तो सिर पर चढ़ कर बोलती है, आज नहीं तो कल सारा भेद खोलती है ! फिर इनके फिल्ड अलग अलग हैं जहां संजय दत का सवाल है वह एक कला कार है जानी मानी हस्ती है, उसका जेल के अन्दर जेल की रोटी खाना उसके बहुत से चहेतों को नागँवार लग रहा होगा लेकिन जहा तक श्री संत का सवाल है यह तो अचानक बरसाती मेढक की तरह टर टराता हुआ क्रिकेट के स्वच्छ जल से भरा तालाब में पिछले दरवाजे से घुसा तालाब को गन्दा कर गया ! वह तो समय पर पता चल गया नहीं तो यह मेढक और क्या क्या गुल खिलाता पूरी क्रिकेट विरादरी पछताता ! श्री संत कोई खिलाड़ी वलाडी नहीं है, लेकिन क्रिकेट टीम पर एक धब्बा है ! इसको दगाबाजी के लिए शक्त से शक्त सजा मिलनी चाहिए ! एक तो कुदरत मेहरवान थी करोड़ों में खेल रहा था, फिर भी पेट नहीं भरा अब जेल में भर पेट खाएगा !

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आज मै एक ऐसी रचना लेकर आप सब के सामने उपस्थित हुआ हूँ, जिसे पढ़कर आप सब की आँखे नाम हो जायेगी. और यही हमारे देश की कड़वी सच्चाई भी है, इस कविता के माध्यम से मै ऋषभ शुक्ला, इस समाज का निर्दयी ही सही लेकिन है तो सच. आज हमारे समाज के लोग महिलाओ के प्रती वही पुरानी सोच रखते है जो वह हमेशा रखते आये है, और आगे भी ऐसी ही सोच रखने का इरादा है. गरीब माँ-बाप अपनी बेटियों को बोझ समझते है और वह संतान के रूप में एक बेटा चाहते है, और इसके लिए वह गर्भ में ही जाच के द्वारा उन्हें यदी पता चल गया की गर्भ में बच्ची है तो उसे इस दुनिया में आने से पहले ही मार देते है, उस नन्ही सी जान को जो इस निर्मम दुनिया में आने को बेताब रहती है, उसकी सभी इच्छाओ को भी मार देते है . मै इस कविता के माध्यम से उस छोटी गुडिया के दर्द को आप सब से मुखातिब करने का प्रयत्न कर रहा हूँ. कृपया मेरी गुजारिश है की आप सब इस लिंक को देखे और उसके बारे में कम से कम दो शब्द कहे. यदी कमेंट देने में कोई असुविधा हो तो उसे लाइक करे या वोट करे. http://rushabhshukla.jagranjunction.com/?p=25 शुक्रिया

के द्वारा: ऋषभ शुक्ला ऋषभ शुक्ला

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यही तो केंद्र सरकार ने सीखा इन क्षेत्रीय दलों से अपने निहित स्वार्थ के लिए ये देश कि साख को बट्टा लगा रहे है सच में हमारी विदेश नीति अमेरिका परस्त हो गयी है कुछ लोगो के अपने स्वार्थ के लिए! इतिहास गवाह है अमेरिका सिर्फ अपने फायदे की बात करता है अपने हित साधने के बाद वह सभी को भूल जाता है इराक में अमेरिकी कार्यवाई किस तरह के मानवाधिकार के अंतर्गत आती है जब खुद पे चोट लगती है तब दर्द समझ में आता है अपनों से दुश्मनी करके कोई बच नहीं सकता, हमे अपने पड़ोसियों से कैसा सम्बन्ध रखना है ये हमे अमेरिका से पूछने की जरुरत नहीं होनी चाहिए खुद पे चोट लगती है तो घर में घुस कर मारते है और हमे मानवाधिकार का पाठ पढ़ाते है किसी भी कीमत पर हम अपनी विदेश नीति को गिरवी नहीं रख सकते, हमे अपने हितो के विरुद्ध कोई समझौता नहीं करना चाहिए

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इस कानून में कुछ भी गलत नहीं है। वैसे भी देखा जाय तो एक बड़ी संख्या में किशोर 16-17 वर्ष की उम्र में सेक्स संबंध बना लेते हैं और इसमें कोई दिक्कत भी नहीं है क्योंकि वो उस वक्त सेक्स के लिए तैयार रहते हैं। इसी उम्र में मानव शरीर में सेक्स संबंधी हार्मोनों का स्राव सर्वाधिक होता है। ये हर्मोन किशोरों में सेक्स की प्रबल इच्छा जागृत करते हैं और इसी कारण वो विपरीत सेक्स की तरफ आकर्षित होते हैं। चुँकि यह गैरकानूनी है इसलिए वे छुपकर सेक्स करते है और पर्याप्त जानकारी के अभाव में असुरक्षित सेक्स करते हैं इसलिए न सिर्फ 16 की उम्र में सेक्स को कानूनी बनाना चाहिए बल्कि 14 या 15 की उम्र में सेक्स शिक्षा भी दी जानी चाहिए। हाँ, इस कनून में एक नियम यह हो कि सम्बंध बनाते समय कोई गर्भ निरोधक अवश्य इस्तेमाल किया जाय क्योंकि कम उम्र में माँ बनना स्वास्थ्य व कैरियर दोनों पर दुष्प्रभाव डाळता है।

के द्वारा: prashantsingh052 prashantsingh052

श्री नगर में आतंकियो द्वारा किये हमले में सहीद हुए जवानो को विनम्र सर्धांजलि तभी होगी जब इसका करारा जबाब पाकिस्तान को दिया जायेगा यह सवाल पहले भी उठते रहे है और बार बार समाचार पत्रों की सुर्खिया बन कर फिर शांत हो जाती है लेकिन सबसे अहम् सवाल इस हमले के बाद वर्त्तमान में यह उठता है की जब सजे अफजल को फासी हुई तभी से यह बात सामने आ रही है की अफजल के फासी से एक वर्ग विशेष में गलत सन्देश गया और कश्मीर में शांति भंग हुई अफजल की फासी के बाद से ही यह मुद्दा सुलगता रहा और परिणाम भी हमारे सामने है लेकिन आतंकी हमलो के गुनाहगार अफजल गुरु जिसने स्वयम यह काबुल किया था की उसकी संलिप्तता इन घटनाओ में थी और उसी के आधार पर सर्वोच्य न्यालय ने उसे फासी की सजा दी और वर्षो राजनीती का मुद्दा बन्ने के बाद अंततः अफजल को फासी हुआ तो क्या यह फासी गलत दी गई ?आखिर क्यों एक वर्ग विशेष को उसकी फासी पर आपति है क्या इस वर्ग विशेष जिनमे वामपंथी पार्टिया और तुष्टिकरण की राजनीती के करने वाले नेता भी सामिल है को भारत के कानून व्यवस्था पर विस्वाश नहीं है क्या देश की सीमओं से इन्हें प्रेम नहीं है क्या देश के दुश्मनों को ऐसे ही वोट के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए ऐसी अहिंसा किस काम की आज उन्होंने हमारे ५ जवानो को मार गिराया जो की हमारी अखंडता को खुली चुनौती है जम्मू कश्मीर विधान सभा में अफजल के समर्थन में नारे लगाये जाते है यह देश की विडम्बना नहीं तो और क्या है ?लचर प्रशासनिक तंत्र ,लचर राजनीती ने आज इस देश की एकता और अखंडता को खतरे में डाल दिया है यदि यही आलम रहा तो निकट भविष्य में इसके गंभीर परिणाम हमारे सामने खड़े हो सकते है अभी वक्त है इस संकट से उबरने के बस सर्कार की इक्षा सकती मजबूत होनी चाहिए .

के द्वारा: jagojagobharat jagojagobharat

आज जब कोई ग्रेजुएट अपनी नौकरी पर लगता है तो उसे एक लक्ष्य (टारगेट) दिया जाता है और पूरा न कर पाने पर नौकरी से निकल दिया जाता है. सरकारी नौकरियों में टारगेट क्यों नहीं रखे जाते. सरकारी कर्मचारी, अधिकारी सरकारी कामों को करने में रूचि रखते हैं या नहीं आखिर वह कम उन्हें करना तो पड़ेगा ही आखिर देश के मालिकों के द्वारा दिए गए धन से उनका घर चलता है. अब उनका काम देश की सेवा करने की नौकरी है जिसकी वे तनख्वाह लेते है.  अगर उन्हें यह काम पसंद न हो तो वे नौकरी छोड़ सकते है हमारी कोई जबरदस्ती तो नहीं है. फिर नेता भी देश का सेवक ही है. कोई भी नेता इस नियम से बचना नही चाहिये. कोई भी नही... हर तीन  महीने का टारगेट पूरा करो या स्तिफा दो.....पॉच साल तक अब कोई इन्तजार नहीं करेगा....

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,हैदराबाद में हुए भीषण विस्फोट में अनेक मासूम अपने प्राण गँवा बैठे। इस तरह अचानक किन्ही दरिंदो के मंसूबा पूर्ती का निवाला बन गए,मेरे देश के नागरिक। लगातार नियमित अंतराल के बाद आतंकी घटनाएँ हो रही हैं, और हमारी सरकार कुछ रटे -रटाये शब्दों और कुछ राशी देने के एलान की रस्म अदायगी करके अगली घटना का इन्तजार करने लगती है। अमेरिका में एक बड़ी आतंकी घटना घटने पर आतंकियो को कड़ा जबाब मिला, दोबारा आतंकी हिम्मत नहीं कर सके। चारों ओर से आतंकी देशों से घिरा इजराइल, आतंकियो के लिए आतंक बन चुका है। लेकिन ............ हमारे देश में एक ऐसी सरकार सत्ता में है,जो आतंकियो पर इस डर से कार्यवाही नहीं करती, क्योंकि उसे लगता है, कि ऐसा करने से मुस्लिम नाराज हो जायेंगे। इस प्रकार की सोच रख कर कांग्रेस सरकार एक तरह से सम्पूर्ण मुस्लिम समाज को ही आतंकी ठहरा रही है, बड़ी हैरानी की बात है, कि मुस्लिम समाज को अपना ये अपमान दिख नहीं रहा है,नहीं तो वो अवश्य आतंकियो के साथ अपने को जोड़ने के कांग्रेसी पाप का विरोध करते। जरा याद कीजिये, जब देश की सभी जांच अजेंसियो को भगवा आतंकी खोजने के काम में लगा दिया गया था, तब पाकिस्तानी आतंकियो ने मुंबई में नरसंघार कर दिया, नकली हिन्दू पहचान के साथ भेजे गए वो आतंकी भगवा आतंकी सिद्ध कर दिए जाते,यदि कसाब को जिन्दा नहीं पकड़ा जाता। एक बार फिर अपनी आका के इशारे पर शिंदे ने सारी शक्ति रास्ट्र वादी शक्तिओ को आतंकी साबित करने में लगा रखी थी,और आतंकी दरिंदो ने हैदराबाद को लहूलुहान कर दिया। क्या इस प्रकार से आतंक से लड़ा जा सकता है ? अपने कुछ तुच्छ स्वार्थों के लिए कांग्रेसी सरकार का समर्थन करने वालों से मेरा विनम्र निवेदन है, अपनी आत्मा की आवाज सुनें, और सरकार को इस प्रकार के रास्ट्र द्रोही कृत्य करने से रोकें। देश रहेगा, तभी राजनीती और सत्ता भी रहेगी, ये बात कम से कम स्वदेशी कांग्रेसियो को तो समझनी चाहिए।

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भारतीय रेल आम आदमी के लिए यातायात का एक महत्वपूर्ण साधन है। मौनी अमावस्या के दिन प्रयाग महाकुम्भ में करोड़ों श्रद्धालुओं के एकत्रित होने की खबर पहले से ही थी ऐसे में रेलवे स्टेशन पर अचानक मची भगदड़ में मौत हादसा नहीं बल्कि प्रशासनिक अक्षमता है। कभी मेलों में तो कभी राजनीतिक दलों की रैलियों और कभी परीक्षाओं के समय ऐसी ह्रदय विदारक घटना घट जाती है और बाद में रेल विभाग एवं राज्य सरकार एक दूसरे को दोषी करार देते हैं। जबकि यदि विशेष आयोजनों के समय व्यापक प्रचार के साथ आसपास के अन्य स्टेशनों से विशेष रेलगाड़ियों का संचालन एवं आयोजन स्थल से उन रेलवे स्टेशनों तक बसों का संचालन कर ऐसे हादसों को काफी हद तक टाला जा सकता है।

के द्वारा: Vandana Baranwal Vandana Baranwal

के द्वारा: achyutamkeshvam achyutamkeshvam

वास्तव में, समाज की सबसे छोटी इकाई परिवार है. समाज में क्रांति लाने के लिए व्यक्ति को सबसे पहले अपने परिवार की सोच में परिवर्तन लाना होगा. यदि हर व्यक्ति स्वयं को और परिवार को इस सामाजिक क्रांति के लिए तय्यार करता है तो समाज में स्वयं क्रान्ति आएगी. दूसरों को दोष देने की अपेक्षा या अपनी गलती दूसरों पे डालने की अपेक्षा हम स्वयं अपनी जिम्मेदारी समझें तभी समाज में परिवर्तन संभव है. हम बातें तो बड़ी बड़ी करते हैं पर जब समय आता है तो हम अपनी जिम्मेदारी से हट जाते हैं. जैसा कि हाल ही कि घटना में वे दोनों पीड़ित सड़क पर मदद मांगते रहे. पर कोई भी उनकी मदद के लिए नहीं आया... हमें इसी प्रवर्ति को रोकना होगा. और मदद के लिए हर व्यक्ति को आगे आना होगा... और जो आगे बढे..उसको हमें हर संभव सहायता करनी होगी.. उसे पुलिस और क़ानून से पूरी मदद मिलनी चाहिए...

के द्वारा: rajeshwarisaxena rajeshwarisaxena

के द्वारा: puneetmanav puneetmanav

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चिंटी और हाथी मैंने एक कहानी बचपन के दूसरी कक्षा में पढ़ी थी. शायद शीर्षक मुझे याद नहीं चिंटी और हाथी या हाथी और चिंटी ही था. एक जंगल में एक बड़ा हाथी रहता था. हाथी बड़ा ही मतवाला और घमंडी था. अपने से छोटे जानवरों को वह बहुत ही निचा और तुच्छ नजरों से देखता था. इसी जंगल में एक छोटी सी चिंटी रहती थी. हाथी दिनभर मनमौजी जहाँ तहां घूमता रहता था. चीटियों को तो वह जानबूझकर अपने पैरों तले मशल देता था. चिंटी डरी सहमी रहती थी. एक दिन चिंटी झाड़ियों के अन्दर छुप गयी. जब वह मतवाला हाथी झाड़ियों से पत्ता खाने लगा. चिंटी चुपके से उसके सूंड में घुस गयी. हाथी चिंटी के सुरसुराहट से बैचेन होने लगा. वह अपनी सूंड को जोर - जोर से जमीन पर पटकने लगा. तभी चिंटी ने धीरे से आवाज दी अब बोलो मेरे प्यारे मतवाले भैया दोस्रो को सताने में बड़ा मज्जा आता था अभी मज्जा आ रहा है या नहीं. हाथी ने चिंटी से क्षमा मांगी और बोला अब माफ कर दो चिंटी बहन. मैं अब दूसरों को कभी नहीं सताया करूँगा. शायद इस कहानी से सलमान खुर्शीद को अपने करतूत पर सद्बुधि मिले.

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बकवास भरा लेख।  यदि अन्ना ने यह कहा है कि ...आन्दोलन विभाजित हुआ है तो इसे बिखराव कह कर क्यों भ्रम पैदा किया जा  रहा है? अन्ना ने यह कभी नही कहा कि उनके कन्धे पर बन्दूक रख कर चलायी जा रही है वरन उन्होने स्पष्ट  कहा है कि उनके (अरविन्द) के रास्ते अलग हैं लेकिन उद्देश्य एक ही है। अरविन्द की राजनैतिक मंशा देखने वालों को अरविन्द जी की यह बात क्यों नहीं सुनायी देती कि "यदि लोकपाल,राइट टू रिजेक्ट,राइट टू रिकाल  बिल चुनाव के पहले पास कर दिये जाते हैं तो वे चुनाव में भाग नहीं लेंगें" । यदि अरविन्द की मंशा राजनीति में आने की है तो इसे एक दोष के रूप क्यों प्रचारित किया जा रहा है? इतने अनुनय,विनय,आन्दोलनों के बाद भी इस भ्रष्टतम निरंकुश संवेदनहीन सरकार ने जब जनता की नहीं सुनी तो राजनीति में आने के अतिरिक्त  एक और रास्ता था वह है हिंसक क्रांति का,क्या वह रास्ता बेहतर था? क्या यदि कुछ नौजवानों ने निराश होकर यदि कुछ भ्रष्ट नेताओं,अधिकारियों का वध करना आरम्भ कर दिया होता तो आप यह कहते कि यही अरविन्द की मंशा थी?  हां...अरविन्द राजनीति करेंगे। क्या राजनीति करने का लाइसेंस मात्र कांग्रेस या चन्गु-मंगू (पवार-गडकरी) टाइप के लोगों को ही मिला है? और यदि अरविन्द अब राजनीति में कूद पड़े हैं तो मुद्दे भी जनलोकपाल आदि के बिलों के पास होने तक ही सीमित नहीं रहेंगे,कोयला घोटाला या कोई भी जनहित विरोधी नीति ,मंहगाई आदि भी मुद्दों में सामिल होंगे ही।         ऐसा बकवास लेख किसी स्वतंत्र लेखक को होता तो आश्चर्य नहीं होता किन्तु स्वयं जागरण द्वारा प्रस्तुत इस लेख ने यह सोचने को विवश कर दिया कि कहीं अरविन्द द्वारा भाजपा की पोल खोल देने के कारण ही भाजपाई विचारधारा की तरफ झुका हुआ जागरण समूह अनर्गल प्रलाप करने लगा। 

के द्वारा: ajaykumarsingh ajaykumarsingh

आरक्षण न तो सवर्णों का त्याग है और न पश्चाताप और न ही मजबूरी | मजबूरी का नाम तो कभी महात्मा------हो ही नहीं सकता | क्योंकि महात्मा का लोग अर्थ समझते हैं महान आत्मा और जिसकी और इशारा है वह -------महात्मा था ही नहीं | आरक्षण यदि सवर्णों का त्याग होता तो दलितों को यह हजारों साल पहले मिल गया होता | आरक्षण यदि सवर्णों का पश्चाताप होता, तो भी यह दलितों को हजारों साल पहले मिल गया होता आरक्षण यदि सवर्णों की मजबूरी होती तो भी यह दलितों को हजारों साल पहले मिल गया होता | आरक्षण यदि मजबूरी का नाम महात्मा------होता तो गाँधी इसका विरोध कभी नहीं करते ! चूँकि दलितों को आरक्षण तो १९३१ में ही अंग्रेजों ने दे दिया था | राजनैतिक आरक्षण तब दिया गया जब दलितों की बराबर की हिस्सेदारी की मांग डॉ बी आर अम्बेडकर ने अंग्रेजों से की थी और अंग्रेजों ने इसे लागु करने का मन भी बना लिया था | किन्तु तथाकथित गाँधी ने सितम्बर १९३२ में आमरण अनशन करके दलितों की हिस्सेदारी की मांग को दरकिनार करा दिया | आरक्षण का विरोध व् समर्थन करने वाले सभी को यह समझना जरूरी है की आखिर आरक्षण क्यों दिया गया ? शायद इस प्रश्न का उत्तर गिने -चुने लोग ही जानते होंगे | मेरे पास इसका उत्तर आज भी है किन्तु मैं इसका उत्तर इस लेख में नहीं देना चाहता | फिर भी ऊपर सुझाये गए मत से मैं सहमत नहीं हूँ क्योंकि जब तक इस देश में जाति व्यवश्था कायम रहेगी तब तक अछूतपन बना रहेगा और जब तक अछूतपन रहेगा तब तक बराबरी नहीं आ सकती ! फिर भी आरक्षण का विरोध करने वालों को याद रखना चाहिये कि केवल राजनैतिक महत्वाकांक्षा की खातिर झूंठ का सहारा क्यों लिया जा रहा है कि प्रमोशन में आरक्षण असवैधानिक है ? उनका यह कहना हास्यापद है कि प्रमोशन में आरक्षण मिलने से जूनियर, सीनियर हो जायेगा और सीनियर, जूनियर हो जायेगा | विदित रहे कि सरकारी नौकरियों में प्रमोशन चरित्र प्रविष्टी के आधार पर होता है अर्थात किसी दलित का प्रमोशन भी तभी होगा जब उसकी चरित्र प्रविष्टी अच्छी होंगी | फिर किसी सामान्य व्यक्ति की योग्यता कैसे प्रभावित हो सकती है ? प्रमोशन में आरक्षण श्री मोहनदास करमचंद गाँधी व् डॉ० भीमराव अम्बेडकर के बीच २३ सितम्बर १९३२ में हुए पूना पैक्ट के अनुसार दलितों का अधिकार है और यह अधिकार मिलना ही चाहिए | साथ ही एस० सी०/एस०टी० की भांति उच्च पदों पर पिछड़े वर्ग का पर्याप्त प्रतिनिधित्व न होने के कारण पिछड़े वर्ग का भी प्रमोशन में आरक्षण का प्राविधान होना चाहिए | प्रमोशन में आरक्षण का विरोध करने वालों को भी सदबुद्धि से दलितों के साथ साथ पिछड़ों को भी प्रमोशन में आरक्षण मिले, यही मांग करनी चाहिए | प्रमोशन में पिछड़े वर्ग को भी आरक्षण मिले इस मांग का पूरा दलित समाज समर्थन कर रहा है | यदि उपरोक्त मांग आरक्षण विरोधियों को अच्छी न लगे तो दूसरा विकल्प है कि देश की धन-धरती, शासन प्रशासन, सेना, न्यायपालिका, व्यापार और मीडिया पर काबिज लोग एक बार दलितों को देश की धन -धरती, शासन प्रशासन, सेना, न्यायपालिका, मीडिया और व्यापार में आबादी के अनुपात में बराबर की हिस्सेदारी दे दो |   यदि आरक्षण विरोधियों को दूसरा विकल्प भी अच्छा नहीं लग पा रहा हो तो तीसरा विकल्प है कि फिर पूरे देश में अंतरजातीय विवाह अनिवार्य कर २० साल के अन्दर जाति नाम का समूल नाश कर जाति व्यवस्था ख़त्म कर समता मूलक समाज बना दो | शायद फिर दलितों को प्रमोशन में आरक्षण और नौकरियों में आरक्षण की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी | यदि आरक्षण विरोधी उपरोक्त तीनो विकल्प में से कोई भी मानने को तैयार नहीं है तो फिर देश के मूलनिवासी दलितों और पिछड़ों को तीसरी आज़ादी की लड़ाई के लिए तैयार हो जाना चाहिए | -धर्मेन्द्र प्रकाश, अध्यक्ष, भारतीय मूलनिवासी संगठन |

के द्वारा:

महोदय अगर और मगर में बहुत अंतर है आपके कथनानुसार अगर मोदी ही देश के अगले प्रधान मंत्री बनते है तो जैसा एनडीटीवी वालों का सर्वे है तो यह देश और दुनिया के लिए आठवां आश्चर्य ही होगा क्योंकि फिर तो अमेरिका को भी मोदी की अगवानी में पलक पावंडे बिछाने होंगे और जो वीजा आज तक नहीं दिया था वह भी देना ही होगा लेकिन यह तभी संभव होगा जब आज ही चुनाव हो जाय लेकिन आज किसी भी हालात में चुनाव नहीं होने जा रहे है इसलिए ख्याली पुलाव ही ठीक है गुजरात दंगो पर एक दो फैसले और आ जाने दीजिये चौबे जी छब्बे जी तो नहीं बन सकेंगे दुबे जी जरूर हो जायंगे ? क्योंकि जिस गुजरात अस्मिता की बात हिन्दू कार्ड केद्वारा गुजरात ही नहीं पुरे देश में खेलने की तैयारी है वह कभी पूरी नहीं हो सकती -- क्योंकि सिख ईसाई और मुस्लिम को छोड़ कर जितना भी हिन्दू है वह स्वयं ही विभिन्न जातियों में विभाजित है वह केवल हिन्दू हित को खतरे में दिखा का संगठित नहीं किया जा सकता ?

के द्वारा:

हैलो! आप के लिए बधाई (peacegarg@yahoo.co.uk) मुझे आशा है कि इस मेल को आप अच्छी तरह से मिल जाएगा और स्वस्थ है और मुझे आशा है कि हम एक रिश्ते की स्थापना के बाद से हम यहाँ पहली time.I के लिए बैठक कर रहे हैं एक प्रोफाइल है कि अच्छा बोलती के माध्यम से चले गए हैं इस साइट पर आप में से मैं प्रभावित था जब मैं अपने प्रोफ़ाइल देखा और you.It के साथ संवाद करने का फैसला मेरे लिए आप जानते हैं की इच्छा है, मैं ईमानदारी की तरह, विश्वास, प्यार, देखभाल, सच तो यह है, और सम्मान. कृपया मेरी निजी मेल बॉक्स (peacegarg@yahoo.co.uk) के माध्यम से मेरे लिए जवाब तो हम पता कर सकते हैं खुद better.I आशा है कि आप से पढ़ने के लिए अगर आपकी भी रुचि रखते हैं. तब मैं अपने चित्रों को आप के लिए भेज देंगे. धन्यवाद और आप से मेरे याहू आईडी में soonest में सुना है और आशीर्वाद दे रहना उम्मीद है. मिस शांति

के द्वारा:

महोदय ,दिल्ली पुलीस आज भी चौकनी और तेज है इस पर तो शक करना ही नहीं चाहीये , पर राजधानी होने के कारण,नेताओं का केंद्र होने के कारण,सेटिंग व हाई प्रोफाइल के कारण,वह अपनी खाल बचाजाती है!जो की बहूत ही गलत है.क्या ऐसे ही होता रहेगा सब कुछ? ' तो सब न्याय के आगे एक जैसे हैं ', नारे का क्या मतलब? पुलीस को तो बहुत ही अक्ल है क्यों नहीं एन्काउंतर शब्द का अनुप्रयोग करती? सरकार को चाहीये की वह पुलीस लाइन में इन पुलीस वालों को गोविन्द निहालानी के "अर्ध सत्य " पिक्चर दिखाने की वयवस्था करें,आज हमारी पुलीस में कई ॐ पुरी जैसे पुलीस ऑफीसर हैं जो सदाशिव अमरापुरकर जैसे चालाक और रसूकात वाले नेताओं को समाप्त कर सकने का जोखिम भी ले लेंगे. तब कांदा का सब कुछ यहीं धरा रहेगा. हमारी पुलीस को मौखिक अधिकार देने होंगे ताकि कांदा जैसे लोगों को सही कर सके बाकी पुलीस डरेगी तो कौन करेगा यह सब?क्या बदमाश यूं ही घूमते रहेंगे? हमारी पुलीस को कुछ कर दिखाने का मौक़ा मिलना चाहीये!

के द्वारा: pitamberthakwani pitamberthakwani

के द्वारा:

किसने कहा प्रधानमंत्री अंडर अचिभर हैं टाईम्स मगजिन कौन होता है इसे कहने वाला हाँ अगर मनमोहन सिंह की तारीफ़ की होती तो जरुर कांग्रेस पार्टी इसका ढिंढोरा पीटती फिरती वर्ना मनमोहन से अच्छापीएम भारत तो क्या पूरे विश्व के किसी देश में नहीं मिलनेवाला ऐसा मूक दर्शक और चुप पीएम क्या किसी और देश में राज कर सकता है देश को अभी २ साल और इन्हें हिन् झेलना पड़ेगा क्यूंकि विरोधी दलों में इतना दम कहाँ उनका तो कोई सिधांत है ही नहीं और सिधान्तो की राजनीत अब होती भी कहाँ है अब तो सरकार बनाना और उसको किसी तरह बचाना बस दो कम ही कर रहे हैं आज की पार्टियाँ और नेता और जनता करेगी भी क्या ? अगले चुनाव का इन्तेजार और वह तो समय पर हो ही जायेगा क्या अगले चुनाव के बाद इस देश की गरीब जनता का बह्विश्य या वर्तमान बदल जायेगा आज सोंच का विषय यह है न मी कौन पीएम बनेगा और कौन अच्छा पीएम होगा जो भी होगा सारा राजतन्त्र तो यही रहेगा बाबु वाही रहेंगे अधिकारी वाही रहेंगे फिर बदलाव कौन क्लायेगा ये नेता !

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

के द्वारा: sadhna srivastava sadhna srivastava

के द्वारा:

मीडिया देश की एक वह मंत्र है कि जो पेड़ की उँचाई पर भी ले जाती है और कुए मे भी धकेल देती है यह सब कमाई का धंधा है मेरा तो यह देश की मीडिया से निवेदन है कि आख़िर क्यो हिंदू धर्म के बाबाओ के ही पीछे है ! देश काफ़ी बड़ा है ! क्या और धर्म मे नही है ! आख़िर क्यो मीडिया ब्रह्माकुमारी संस्थान के बारे मे जानकारी लेने से घबराती है ! इस संस्थान मे करोड़ो तो क्या अरबो का कारोबार होता है लेकिन मीडिया का इन संस्था से कुछ हासिल होना मुस्किल है ! कारण कि यहा नेता ही नही देश के बड़ी से बड़ी हस्तिया के अलावा सरकारी उच्चाधिकारी ही नही न्याय दिलाने वाले भी यहा आकर नर्वस हो जाते है इसके अलावा मीडिया भी शीश जुका कर अलविदा हो जाते है ! कारण कुछ भी हो लेकिन पेट भर कर तो जाते ही है ! इस संस्था के खिलाफ जो कोई आता है उसके तो वारे न्यारे हो जाते है मेरी सोच तो है कि आज के समय मे कोई मर्द मीडिया है ही नही !

के द्वारा:

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खाली!! मेरा नाम मेलिस्सा है मैं लंबा, अच्छी लग रही है, संपूर्ण शरीर आंकड़ा और सेक्सी हूँ. मैं अपने प्रोफ़ाइल देखा और आपसे संपर्क करने के लिए खुश था, मुझे आशा है कि आप सच्चे प्यार, ईमानदार और देखभाल व्यक्ति है कि मैं 4 देख रहा है हो जाएगा, और मैं कुछ खास करने के लिए आप मेरे बारे में बताना है, तो मुझे अपने ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क करें पर पता (annanmelissa@hotmail.com) इतना है कि मैं भी आप के लिए मेरी तस्वीर भेज सकते हैं सीधे. का संबंध है मेलिसा Hallo!!! My name is Melissa I am tall ,good looking, perfect body figure and sexy. I saw your profile and was delighted to contact you, I hope you will be the true loving, honest and caring person that I have been looking 4, And I have something special to tell you about me, So please contact me directly through my email address at (annanmelissa@hotmail.com) so that I can also send my picture directly to you. regards Melissa

के द्वारा: melissa melissa

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के द्वारा:

हज के लिए सब्सिडी का कोई मतलब नहीं है। कोई भी मुसलमान आर्थिक रूप से सक्षम होने के बाद ही हज के लिए निकलता है और ऐसे में उसे किराए में रियायत की जरूरत नहीं है। सब्सिडी के बाद एक तरफ का किराया 20 से 22 हजार रुपये पड़ता है, जबकि इसी सफर के लिए दूसरी एयरलाइंस 18 से 19 हजार रुपये लेती हैं। ऐसे में सब्सिडी का क्या फायदा। सरकार को हज यात्रियों के लिए सुविधाओं में इजाफा करना चाहिए। हमारी मांग है कि लोगों को रहने, खाने और दवाओं से जुड़ी उचित सुविधाएं मिलनी चाहिए। सरकार सब्सिडी के नाम पर धोखा दे रही है। सब्सिडी के नाम पर ज्यादा किराया लिया जाता है और हज यात्रियों को मुश्किलें भी झेलनी पड़ती हैं। हज की पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के साथ ही इसमें सरकार का दखल कम से कम होना चाहिए।

के द्वारा: syedasifimamkakvi syedasifimamkakvi

एक बार मैं निर्मल बाबा को टी.बी पर देख रहा था ,उनकी शब्दों मैं खुद की तारीफों के आलबा न तो गोद के प्रति कोई प्रेम नजर आ रहा था .मैं निर्मल बाबा की जिन शब्दों पर गौर किया बे मैं आपको बताना चाहता हूँ . शिष्य -महाराज पिचले दिनों मैं फ्रिज लाया बो थोड़े ही दिनों बाद ख़राब हो गयी? निर्मल बाबा -फ्रिज किस कंपनी का था ?क्या गोदरेज का था? शिष्य -नहीं| निर्मल बाबा-अगली बार से गोदरेज का लाना ख़राब नहीं होगा. दूसरा शिष्य- महाराज मेरे यहाँ चोर टला थोड कर ससमान चुरा ले गए| निर्मल बाबा- ताला गोदरेज का नहीं होगा अगली बार से गोद्रेग का टला लगाना| मुझे निर्मल जी बाबा कम गोदरेज के ब्रेड इम्बेज्टर ज्यादा लेट है . आप प्रतिक्रिया या टिपण्णी अबश्य करे. आर्यन दिक्सित शाहजहांपुर poetaryandixit@gmail.com

के द्वारा:

इस जगत में जो दिखता है वह है नही ,जो है वह दिखता नही I यही माया जाल है I माया मदारी तो मन बंदर है जिस के गले में पाँच विकारों की रस्सी डाल कर न जाने कितने जन्मों से नचा रही है I विकारों से बंधा ये मन कर्म करने को विवश होता है और इसी के फलस्वरूप जीव को अछे व् बुरे कर्मों का फल भोगने हेतु इस जगत में बार -बार आना पड़ता है I इस जगत में शक्ति केवल एक है वह है परमपिता परमात्मा की ,जिस की उस परमपिता में अगाध श्रधा और विश्वास है और मन में संतोष है वह परम सुखी है I गुरुबानी में कहा है, नानक दुखिया सब संसार सो सुखिया जो नाम आधार I जहाँ तक किसी की बुराई पर दृष्टीपात करने का सवाल है तो संत कबीर जी कहते हैं ,बुरा जो देखन मैं चला बुरा न मिलिया मोहे , जो मन अन्दर झाकिया मुझ से बुरा न कोय

के द्वारा:

इस जगत में जो दिखता है वह है नही ,जो है वह दिखता नही I यही माया जल है I माया मदारी तो मन बंदर है जिस के गले में पाँच विकारों की रस्सी डाल कर न जाने कितने जन्मों से नचा रही है I विकारों से बंधा ये मन कर्म करने को विवश होता है और इसी के फलस्वरूप जीव को अछे व् बुरे कर्मों का फल भोगने हेतु इस जगत में बार -बार आना पड़ता है I इस जगत में शक्ति केवल एक है वह है परमपिता परमात्मा की ,जिस की उस परमपिता में अगाध श्रधा और विश्वास है और मन में संतोष है वह परम सुखी है I गुरुबानी में कहा है, नानक दुखिया सब संसार सो सुखिया जो नाम आधार I जहाँ तक किसी की बुराई पर दृष्टीपात करने का सवाल है तो संत कबीर जी कहते हैं ,बुरा जो देखन मैं चला बुरा न मिलिया मोहे , जो मन अन्दर झाकिया मुझ से बुरा न कोय

के द्वारा:

भारत में यह पहला वाकया नहीं है जब एक बाबा पर उसके तथाकथित अवतार रूप पर ऊँगली उठाई गई है. पहले भी ऐसे कई लोगो का पर्दाफाश हो चूका है. जो बात अत्याधिक दुखित करने वाली है वो यह है की ऐसे गलत कार्य करने वालो का साथ देने के लिए कितने लोग होते है, जिनमे नेता, मीडिया और बड़े बड़े रसूखदार भी होते है. स्पष्ट है की इस तरह का नेटवर्क स्थापित करना किसी एक आदमी का काम नहीं हो सकता. इसके अलावा एक और बात जिस पर हम लोगो को शर्म आनी चाहिए वो यह की कई लोग भगवान् की भक्ति करने के बजाई आज के इस पढ़े लिखे युग में भी किन्ही अन्य चक्करों में पड़े रहते है. जहा तक मीडिया का सवाल है तो वो ऐसे बाबाओ से ज्यादा दोषी है जो उनका प्रोग्राम दिखता है, जो कई लोगो के मन मस्तिष्क को प्रभावित करता है, विशेषकर जो तर्कों में विश्वास न करके ऐसे लोगो के जाल में फस जाते है

के द्वारा: cosmos100 cosmos100

निर्मल बाबा का गोरख धंधा लम्बे समय से चला आ रहा है , इस धंधे में बाबा अकेले नहीं है, बाबा के इस नेटवर्क में टीवी कलाकार , मीडिया वाले और कुछ नेता लोग शामिल हैं. सब से ज्यादा गुनाहगार है मीडिया जिस ने चंद सिक्कों की खातिर अपना इमान बेच कर बाबे के झूठे और खोखले दावे को बढ़ा - चढ़ा कर पेश किया. देश की भोली भाली मासूम जनता को झूठे सपने दिखा कर उन का दुःख दर्द , मुसीबत दूर करने के झूठी गारंटी दे कर उन के साथ छल किया है. बाबा ने मुसीबत में फंसे हुए गरीब , लाचार लोगों का जम कर आर्थिक शोषण किया. बात इतनी ही नहीं बल्कि बाबा ने कृपा करने के नाम पर मूर्खतापूर्ण उपाय बता कर जनता के साथ भद्दा मजाक किया है. हमारे देश की जनता पढ़ी लिखी ज़रूर है लेकिन सोचने की क्षमता अभी विकसित नहीं हुई है. लोगों को भय और लालच दे कर जम कर बेवकूफ बनाया. इस गिरोह से जुड़े हर सदस्य को कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए !!

के द्वारा: R.K. Telangba R.K. Telangba

मेरी जानकारी मी कुछ समाचार पत्रों मी आया की रेल बिह्भाघ अब हवाई अड्डों की तरह रेल का कार्य कर्म चलेगा अगर यह सुच है तो लगता है हम कोई सपना देय्ख्राहेय हैं जिस डिपार्टमेंट के बाबुओं को यह नहीं पता की प्लात्फोर्म के बहार ट्रेन खड्डी है वोह बत्तातें है अभी ट्रेन २ हौर्स लेट है,कई बार तरीन आकर चल्जाती है इनको पत्ता ही नहीं ,वोह क्या रेल का मुब्क्बला पलने से करेंगे, ट्रेन के टिकेट बहुत महंगे हैं और तरसीं के अन्दर कोई सुबिधा नहीं ,यार्त्रियों को लुटा जाता है ट्रेन देपर्मेंट द्वारा रेसेर्वतिओं कोम्पर्त्मेनेट मी बिना रेसेर्वतिओं बालों पैर बिर्थ होती है जो रेसेर्वतिओं करते हैं वोह किस पारकर रात काटे हैं यह कभी रेल दीप्त ने ध्यान दिया ,ट्रेन के डिब्बे टूटे फूटे होते बाथरूम तक को थिक नहीं होता ,पानी की सुप्प्ली भी नहीं होती और जब देखो नुक्सान के नाम पैर रेल किर्या बड़ा दिया जाता है,यह कहाँ का इन्साफ है,रेल का बुद्गेत अब बद्दा देने की जो खबर है मंत्रीजी को नहीं पता यह कोई बड़ी बात नहीं जनता जानती है इलेक्शन पूरे होगी हैं अब जो मर्ज़ी करो कौन बोलेगा ,क्यूंकि इनके वादे हैं कांग्रेस के साथ कांग्रेस के हाथ ,और जनता कटा ले अपने हाथ, कौन है इस जनता का अगर कोई विरोध करता है तो कहा जाता है सम्पेर्दियक्शक्तिओन को उत्ठेनी नहीं देय्नेग्य जहाँ यह कांग्रेसी और उनके चमचे फ़ैल होते हैं यही उनका खाहन अ और जत्नता मार जाए इनको कोई चिंता नहीं,अगर रेल टिकेट के दाम बड़ा जाते हैं हैं तो देश की जनता के साथ यह धोका होगा ,सुख-सुबिधानी मिलती नहीं और रेल किर्याओं के नाम पैर फिर जनता को लुटा जायेगा ,यह अब रोकना होगा वर्ना फिर जनता सोचेगी अब की इनको भगान ही होगा

के द्वारा:

आधार बारह अंको का आजीवन पहचान नंबर कब मिलेगा आदरणीय दैनिक जागरण न्यूज़ आपको में यह बात कहना चाहता हूँ की मैंने अपना आधार नामांकन तीस अक्टूबर दिन रविवार को शाम पांच बजे करवाया था एन्रोल्ल्मेंट सेंटर था अग्रवाल भवन यमुना विहार अब एक डेढ़ महीने हो गए पर मेरा आधार नंबर अबतक नहीं आया में अबतक इन्तजार में बैठा हूँ की मेरा आधार नंबर आयेगा और मेरा भी एक पहचान प्रमाण होगा यह कहते हैं की नब्बे दिन में आएगा पर मेरा आधार नंबर अबतक नहीं आया अब में कबतक अपनी आधार इस्थिति जाचुं अब आप कृपया मेरा आधार नंबर समय पर दिलवाने की कृपा करेंगे अजय पाण्डेय क ४/५६ गली नो २७ अ वेस्ट घोंडा गंगोत्री विहार बेहिंद गर्ग बूट हाउस डेल्ही ११००५३

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वास्तव में कांग्रेस ने अपना दोगला चरित्र ही उजागर किया है. लोकपाल केवल अन्ना की नहीं पुरे देश की मांग थी. अन्ना तो केवल एक सिम्बल थे. जनता की आवाज़ थे. उन्होंने देश के लिए जो भी करना था हर संभव प्रयास किया. ये तो हम देश वाशियों की कमी है की उनको दुबारा अनशन पे पुरजोर समर्थन नहीं प्रदर्शित किया. देश की जनता को ही इसे भुगतना भी होगा. अब तो पार्टिया निश्चिन्त हो गयी है की जनता अधिक देर तक अपनी बात को नहीं रख सकती. इसी कमियों के कारन हम कई वर्षो तक गुलाम रहे है. फिर भी अन्ना को मै प्रणाम करता हु की उन्होंने हमारे लिए अपने जीवन को दाव पे लगाया और देश की सोयी हुयी जनता को जगाने का कार्य किया. अब देशवाशियो को फैसला करना है की इस भ्रस्टाचार और गरीबी को कब तक सहेंगे. अब भी समय है इस्वर ने अन्ना के रूप में हमें एक मौका दिया था जो हमने लगभग गवां दिया है. आगे जनता को सावधान रहना होगा चुनाव में की कोई भ्रस्त या भ्रस्ताचार को समर्थन करने वाला व्यक्ति या दल जीतने न पाए. इस लोकपाल के आन्दोलन ने कई पार्टियो और नेताओ के चहरे बेनकाब कर दिया है. अब हमारी बरी है की हम अपना और पार्टिया का मूल्याङ्कन करे और सोच समझ कर अपने मताधिकार का प्रयोग करे.

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राज्य सभा में सरकार का व्यवहार, आर एल डी सांसद द्वारा लोकपाल बिल की प्रति फाड़ा जाना सब कुछ प्रायोजित लगता है जिसमें सरकार अपने मन माफिक बिल न पास करा सकने की परिस्थिति से बच सके. लोक सभा और राज्य सभा में हुई बहस को देख कर लोकपाल बिल के बारे में सरकार का मंतव्य अब साफ़ साफ़ नज़र आने लगा है. सरकार को अन्ना टीम, विपक्ष और यहाँ तक कि यू पी ए के अपने सहयोगियों की और जनभावनाओं की कोई परवाह नहीं है. सरकार सत्ता के नशे में मदांध हो रही है. सरकार एक ऐसा कमजोर लोकपाल क़ानून चाहती है जिसमें सी बी आई की भांति लोकपाल की नकेल उसके हाथ में रहे. जिसे सुविधानुसार बनाया और असुविधाजनक होने पर हटाया जा सके. जिस प्रकार सरकार सी बी आई का दुरूपयोग अपनों को बचाने और विरोधियों को फंसाने के लिए करती है, सरकार की मंशा उसी प्रकार लोकपाल का भी दुरूपयोग करने की लगती है. सरकार लोकपाल को एक सरकारी विभाग की तरह पूरी तरह अपने नियंत्रण में देखना चाहती है. लोकपाल को सवैधानिक दर्ज़ा दिए जाने की बात इसलिए की जा रही है ताकि इसका श्रेय राहुल गाँधी को दिया जा सके. सरकार अपने माफिक एक ऐसा लोकपाल चाहती है जो काग्रेस की सत्ता कायम रखने और देश में सल्तनत स्थापित करने में सहायक साबित हो.

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सरकार और कांग्रेस की जिद और का अन्ना का जिन ! लोकपाल पर सरकार और कांग्रेस दोनों यह समझना चाहिए की पिछले दिनों संसद और देश भर में सडकों पर विदेशी किराना स्टोर के मामले में विरोध झेलना पड़ा| इसके साथ में पिछले दिनों अन्ना की अगस्त क्रान्ति से पुरे देश में गरीबों और परेशान जनता में बल और एक उम्मीद की किरण जागी है उसे वर्तमान सरकार और कांग्रेस को इतने जल्दी नहीं भूलना चाहिए| कांग्रेस अड़ियल रूख इस लिए भी धारण किये हुए है उसे पता है की अन्ना टीम की जन्लोक्पाल बिल का आधार सही है और जनता उसे सही भी मान रही है नहीं मान रहे है तो भ्रस्त नेता | संसद में जन्लोक्पाल बिल पर भाजपा घडियाली आंसू बहा रही है की उसे इस बिल से विरोध है पर सवाल यह उठता है की जब विदेशी किराना स्टोर मुद्दे पर संसद नहीं चलने दे रही थी तो अब इतने आसानी से कैसे कह कर कैसे निकल गयी, की उसे संसद में सरकार द्वारा पेश किये गए लोकपाल बिल का विरोध है| हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए की शिवसेना और भाजपा एक सिक्के के ही दो पहलु हैं और उसका काम तो शिवसेना कर ही रही है | मुलायम सिंह यादव को समझना होगा की उत्तराखंड में खंडूरी जी को दरोगा से क्यों नहीं भय लग रहा है, और दावे से यह कहा जा सकता है की खंडूरी जी के कार्यों से भविष्य में उत्तराखंड में खंडूरी जी की पुनः सरकार बननी तय है इसमें ना कोई भाजपा ना कोई धर्मं राजनीती | काग्रेस को भविष्य में अगर लम्बे समय तक सत्ता का सुख भोगना है तो उसे सी बी आई और ग्रुप सी और डी के मुद्दे पर सकारात्मक कदम उठाना पडेगा| मुसलमानों को आधार बना कर वोट बैंक की राजनीती सफल नहीं हो पाएगी, संसद में मुस्लिम आरक्षण विरोध तो करते देखे गए पर कोइ सांसद यह विरोध करते नहीं देखा गया की आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए, इस मुद्दे पर सदन से वाक् आउट क्यों नहीं हुए, सचाई यही है की गिरते हुए को कोइ भी उठाना नहींa चाहता | सरकार और सांसदों की यही रवैया रही तो जो लोग कुछ सोच समझ कर वोटिंग प्रक्रिया में भाग भी लेते थे उनका भी मोह भंग हो तो होगा ही साथ में पार्टी का मोह छोड़ कर निर्दल प्रत्यासी को ही अपने सेनापति चुनेगा| सरफराज आलम सोनभद्र उत्तर प्रदेश

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आदरणीय अन्ना हजारे चाहे सही हो या गलत हों. सवाल तो यह है ही नही सवाल यह है की अन्ना हजारे जो चाहते है या उनके साथी हिस बात की जिद कर रहे है है वह सब कुछ इस लोक तंत्र के दायरे में हो सकता है या नहीं अगर हो सकता है तो सरकार को तुरंत कर देना चाहिए नहीं तो आन्दोलन को सख्ती से दबा देना ही उचित होगा किसी भी मामले को लटकाने से समस्या का कोई समाधान नहीं निकल सकता ? चूँकि अन्ना हजारे के चेले जिस भ्रष्टाचार को लेकर ढोल पीट पीट कर पुरे देश की छवि को जिस प्रकार से धूमिल कर रहे है वह कोई स्वस्थ्य परम्परा नहीं कही जा सकती कभी वह अपने आप और अन्ना को संसद से ऊपर बताते है कभी संसद में बैठे लोगों को चोर बताते है वहीँ दूसरी ओर वही सबकुछ वे लोग स्वयं कर रहे है और सीना जोरी में कहते है हमें फांसी पर लटका दो लेकिन हमारा जन लोकपाल पास करदो इससे तो ऐसा ही लगता है की जनलोकपाल कुछ ख़ास लोगों की जागीर बन कर रह गया है - जब अन्ना हजारे और उसकी टीम को जनतंत्र और संसद में ही विशवास नहीं रहा तो फिर वह प्रधान मंत्री से लोकपाल की मांग क्यों कर रहे है - यह तो वैसे ही हुआ जैसे और राजनितिक पार्टिया जनता को ठगती है यह कथित सिविल सोसाइटी भी उसी प्रकार से जनता को ठग रही है केवल कुछ लोगों का मकसद ही अपने आपको स्थापित करना भर ही है -- लोक तंत्र में फुल स्टाप का कोई स्थान नहीं केवल विराम और अर्ध विराम ही होता है सब क़ानून और नियम जनता की सुविधा के अनुसार ही होने चाहिए इस लिए आज की यह आवश्यकता है की वर्तमान में जो भी और जैसा भी क़ानून के द्वारा लोकपाल बन रहा है उसे बन जाने देना ही उचित है और उसमे जिस किसी भी परिवर्तन की जरूरत हो आगे भी किया जा सकता है इस लिए लोकतंत्र में आन्दोलन ही सबसे बड़ा हथियार होता है हठ-योग नहीं - इस लिए अन्ना और उनके साथियों से अनुरोध है की वह अन्ना की जान को दावं पर न लगाए तो अच्छा है - नहीं तो इससे यह सन्देश अपने आप निकलता है की अन्ना एंड पार्टी को शायद यह कार्य किसी ने ठेके पर दिया है जिसे वह सिमित समय में करना चाहते है ? गरीब दास

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13 दिसंबर, 2001 को दिन में 11 बजकर 40 मिनट पर जिस समय संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा था, उसी समय जैश-ए-मुहम्‍मद के पांच आतंकवादियों ने संसद भवन पर हमला कर दिया. इस आतंकी हमले में दिल्ली पुलिस के पांच जवान, सीआरपीएफ की एक महिला कांस्टेबल, संसद के दो गार्ड, संसद परिसर में काम कर रहा एक माली और एक पत्रकार शहीद हो गए थे.दस लोगों की हत्या और देश की संसद पर हमला कर देश के साथ बगावत करने का आरोपी आज भी चैन से जेल में जी रहा है. आज दस साल बाद भी सरकार के रहमो-करम से वह आजाद है और उन सभी आतंकियों के लिए प्रेरणा बन चुका है जो इस देश का अमन और चैन लूट लेना चाहते हैं. राष्ट्रपति को अब अफजल की दया याचिका को निरस्त करके उसे फंसी दे देनी चाहिए.... १२ साल हो गए लेकिन सब पार्टिया अपनी कुर्सी सँभालने में लगी है और पैसा कमाने में जुटी है इन नेताओ से बस भ्रस्ताचार की पड़ी है उस जगह से इनता खालो और उस जगह से उतना बस पैसा खाने में लगे ह देश क बारे में कोई नहीं सोचता अगर इन नेताओ के बच्चे मार दी जाये तो तब पता चलेगा के क्या होता दर्द उनसे पूछो जिन्होंने अपने भाई बहन माँ बाप बेटा और बहु खोये है ! लाखो करोडो रुपए इन आतंकबादियो के परवरिस में लगते है २०-२० साल हो जाते है होता कुछ बी नहीं और बाद में इन जालिमो बाई इज्ज़त रिहा कर दिया जाता है ये है मेरे देश का अँधा, लाचार, कमज़ोर और लापरवाह कानून जो अपने देश के लिए कुछ भी नहीं कर सकता.....जब तक इस देश में भ्रस्ट और डकेत नेता मंत्री रहेंगे तब तक इस देश का कुछ भी नहीं हो सकता....अरे जो मेरे देश के शहीदों के कफ़न को बेच के पैसे खा गए तो वो और क्या क्या करेंगे...

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भारत का साधारण आप आदमी अपने, जो सदियों से ठगा जा रहा है कभी मुस्लिम आक्रान्ताओं के द्वारा कभी विदेशी हुक्मरानों के द्वारा और आजादी के बाद अपने ही राजनेताओं के द्वारा तो अब आधुनिक स्वयंभू कथित सिविल सोसाइटी रूपी भाग्य विधाताओं से इतनी तो अपेक्षा रखना चाहता है कि जो उसके हित कि बात करता है और सार्वजनिक जीवन से भ्रष्टाचार को ख़तम करना चाहता है उसका अपना दामन तो पाक साफ़ होना ही नहीं चाहिए बल्कि साफ़ साफ़ दिखना भी चाहिए, नहीं तो उसे तो जो अब तक भुगता है और आगे भी भुगतना पड़ेगा ? जन लोकपाल कि रट लगाने वालों के इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि अपने दामन पर लगने वाले दागों को भी देखे केवल इतना कह देने से कोई दामन साफ़ नहीं हो जाता कि अगर "हमने आपराध किया है तो हमें जेल भेज दो " यह केवल खीज को दर्शाता है जनता किसी को जेल नहीं भेजती वह अपने मन से निकाल देती है जेल तो सरकार भेजती है - अगर किरण बेदी यह कहती है कि उसने झूंठ बोल कर जो पैसा लिया है वह अपनी धर्मार्थ संस्था को दे दिया है कौन सी बहादुरी कर दी है, तमाम काली कमाई करने वाले व्यापारी, नेता और अफसर अपनी काली कमाई से लाखो करोड़ों रूपये पंडितो/पुजारियों और मंदिरों में दान देते है और कथित सिविल सोसाइटी को भी वाही लोग चंदा देते है तो फिर यह सिविल सोसाइटी कैसे पाक साफ़ होने का दावा करती है - सबसे बड़ी बात यही है कि अगर आपने कोई भ्रष्टाचार या गलत काम नहीं किया है तो डर किस बात का और किस बात कि बदनामी, जब हम बात पारदर्शिता कि करते है तो हमारे जीवन का कार्यों में भी पारदर्शिता दिखानी चाहिए ?

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एक बात तो तै है की अगर इस तरह का हमला आज एक बड़े वकील पर हुआ है कल किसी जज पर भी हो सकता है और जब इतनी आसानी से कोई भी इस तरह का निम्न स्तर अपना काम कर के चला जाता है तो इस का मतलब की मीडिया में सिर्फ देखावा होता है के मुंबई में या देल्ली में प्रशाशन चुस्त है और किसी भी आतंकवादी घटना से निपटने के लिए अलर्ट कर दिया गया है| तब तो कोई भी आदमी आसानी से अपना काम कर के जा सकता है| प्रशांत भूषण हमला का कारन चाहे जो भी हो पर यह कार्य पूर्व नियोजित पूरी मीडिया न्यूज़ कवर करने के लिये पहले तैयार थी, और पैसे ले कर किया गया था कश्मीर तो एक बहाना था क्यों की अन्ना की टीम से इस वक्त बीजेपी को लाभ ही हुआ है और आर एस एस बीजेपी दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं | पूरी मीडिया न्यूज़ कवर करने के लिये पहले तैयार थी| इतना अगर देश भक्ति जग रही है तो देश में ऐसे बहुत से काम हो रहे जो देखते हुए भी कोई बोलने को तैयार नहीं है |

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प्रिय जागरण जंक्शन महोदय, सादर वंदे मातरम| मुझे समझ में नहीं आता की राष्ट्र को लक्ष्य कर दिया गया किसी का बयान उसकी निजी अभिव्यक्ति कैसे हो सकती है? घायल तो राष्ट्र हो रहा है ...फिर ऐसे बेतुके बयान को राष्ट्रद्रोह की श्रेणी में क्यों न माना जाय?प्रशांत भूषण जैसे पढ़े लिखे शख्श से ऐसी आशा नहीं थी..उन्होंने जानबूझ कर राष्ट्रीय चरित्र का हनन किया है..मर्यादा को तोडा है और इस निमित्त उनपर हुआ सांकेतिक हमला मात्र एक राष्ट्रभक्त का क्षणिक भावपूर्ण उद्वेग है.....प्रशांत भूषण जैसो को इससे भी कड़ी सजा मिलनी चाहिए...इतनी कड़ी की कोई भी हमारे देश की अखंडता पर बोलने से पहले सौ बार अवश्य विचार करे|श्री राम सेना जिंदाबाद|जय भारत, जय भारती|

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भाई साहब आप ने सही कहा एक बार यह भी है की मोदी जी बराबरी राहुल जी नहीं कर सकते क्यों की फिर उनको भी गुजरात निति अपनाने पड़ेगी जो वोह कर नहीं सकते | गुजरात को विश्व पटल पर एक कॉरपोरेट जगत के रूप में उभारने के लिए मोदी जी ने बहुत मेहनत किया है और पिछले गुजरात के माहौल को पटरी पर लाने के लिए कुछ तो नया करना ही पडेगा रही बात विकास की तो देश और राज्य के विकास और लिए जनता जनता का पैसे को जनहित में तो खर्च करना ही पड़ता है इस की तारीफ़ करना पडेगा जो की दिल्ली की मुख्यमंत्री से भी आगे निकल गए है| जनता बेचारी क्या करे उन्हें नेताओं की निति पता है| थक हार कर उन्हें अपने रोजगार के बारे आज नहीं तो सोचना ही पडेगा | जब मुंबई में और आसाम में बिहारी लोगों पर हमला हो रहा था तो जनता को ही आपस में समझौता करना पड़ा था| राहुल और कांग्रेस की लोकप्रियता तो कुछ कांग्रेसियों के ही वजह से ही घटी है| सही तरीके से देखा जाये तो बी जे पी पार्टी का शासन सभी पार्टी से अच्छा रहा है पर बाबरी काण्ड और उनके कुछ फाएर ब्रांड नेता की बेतुकी बयान बाजी ने लोगों का विस्वास खो दिया है भाजपा हो कांग्रेस सता किसी के घर की खेते नहीं की जब चाह बोया और काटा| साशन अगर जनता के लिए है तो जनता की तरह सोचना होगा |

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भाई साहब आप ने सही कहा पिछले दो तीन दिनों से . राजा, कलमाड़ी, कनिमोझी तीनो बहुत खुस हैं और आपस में बातें कर रहे हैं हर जगह बस यही चर्चा की चिदंबरम अंकल आने वाले हैं कुछ खुसखबरी लाने वाले हैं पुरे तिहाड़ जेल में खुशहाली ही खुशहाली है तय्यारी जोरों पर है पुराने कैदी भी खुश है हाँ भाई हाँ हम लोगों का स्तर अब ऊपर उठने लगा है| कुछ तो यह भी कह रहें है की अरे यार चलो जब यह लोग संसद की गरिमा बढाकर अब यहाँ की शोभा बढ़ा सकते हैं तो हम लोग भी संसद तक क्यों नहीं जा सकते हैं| घोटालेबाजी में तो अन्ना जी ने हिन्दुस्तानियों के साथ बड़ा आन्दोलन चलाया लेकिन संसद में बैठे लोग यह सोचे की किसी तरह टाल दो यह काममेरा थोड़ी न है दूसरी सर्कार आएगी तो समझेगी कुछ ही दिनों की ही तो बात है | सरफ़राज़ आलम सोनभद्र उत्तर प्रदेश

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जनाब यह इस देश का दुर्भाग्य ही कहा जायेगा की इतने सारे तथाकथित अर्थशास्त्रियों बुरी तरह से घिरी इस देश की वर्तमान शासक पार्टी हर उचित और अनुचित प्रकार से देश पर और आम नागरिक पर शासन (जुल्म) कर रही है........ ये लोग अनपढ़ों से भी निम्नतर आकलन करने में व्यस्त रहते हैं......आँखों के होते हुए भी अंधों जैसा व्यव्हार लगातार करती जा रही है........ पता नहीं इन अर्थशास्त्रियों ने कौन सी अर्थ नीति अथवा अनार्थ्नीति का अध्ययन किया है, जिनके कारण आज आम आदमी खून के आंसू रो रहा है..............इन्हें वोट देकर इस देश की जनता ने कौन सा पाप कर दिया की ठगे से रह गए हैं........पहले कहते थे की हमारे हाथ में जादू की छड़ी है.....हमें ही वोट दो.......तुम्हारा जीवन संवार देंगे..........लेकिन वही ठग आज हर बार एक नया जख्म दे कर कहते हैं की हमारे पास कोई जादो की छड़ी नहीं है जो तुम्हारे दुःख हर ले........वह री मनमोहिनी ठगी.......... क्या पागलों वाली हालत में ये योजना आयोग इस देश की जनता के कल्याण के लिए हिसाब किताब करता है ? क्या इस आयोग में कोई भी इतना बुद्धिमान नहीं बचा जो शहर में ३२ रुपये और गाँव में २७ रुपे प्रतिव्यक्ति आय को गरीबी से ऊपर की आय का सही सही आकलन कर सके......???????? मैंने अपने इस जीवन में इस से बुरा शासन प्रबंधन कभी नहीं देखा.............. भगवन हम भारतवासियों को इस मूर्खों, लुटेरों, और तुगलकी शाशकों से मुक्ति दे ताकि अन्ना जी के सपनों की आज़ादी का हमें अहसास हो और हम भी कभी चैन की दो वक्त की रोटी बिना किसी बैरभाव के सभी हिन्दुस्तानी आपस में प्यार प्रेम से खा सकें.........

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दिल वालों की दिल्ली दहली फिर एक बार... से काम नहीं चलने वाला है, बल्कि  नहले पर दहले की जरूरत है। आखिर हिन्दुस्तान में ऐसा कब तक चलता रहेगा। बम विष्फोट की यह आखिरी घटना नहीं है। आतंकवाद से  भारत का नागरिक खुद लड़ रहा है। जनता इस बात को बखूबी समझ रही है कि  आतंकवादी और उन्हें शह देने वाले  सरकार के कथित कुछ जिम्मेदार दोनो  तिहाड़ की शोभा बढ़ाने में लगे हुए हैं। देश की सुरक्षा में शहादत देने वाले  जवानो और अधिकारियों के परिजनों को सरकार आतंकवादियों को सजा में  बिलम्ब कर क्या संदेश देना चाहती है. हर घटना के बाद नागरिकों को विश्वास दिलाने में सरकारें नाकाम रही हैं। कुछ तो शर्म करो, देश के जिम्मेदारों...उस दिन की प्रतीक्षा नहीं की जानी चाहिए कि जनता खुद फैसला देकर आतंकवाद  और उसके बढ़ावा देने वालों के खिलाफ खुद बड़े कदम उठाने से न हिचके।जन  ज्वार से मुसीबत खड़ी हो सकती है।   प्रमोद कुमार चौबे   ओबरा सोनभद्र 

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अन्ना व उनकी टीम का शुक्रगुजार एक गांधी फिर यहाँ जन्म लेकर चल पड़ा है, देख लो सारा वतन! देश, फिर से उसके पीछे ही खड़ा है। सरकार यह मानती है कि जैसे ही मां के पेट में बच्चा गर्भ धारन कर लेता है उसका सीधे आपरेशन कर दिया जाना चाहिए ताकी माँ की जान को कोई खतरा न हो। श्री अन्ना हजारे की सोच भी इसी खतरे की आशंका जाहिर कर रही थी कि कहीं श्री अन्ना हजारे गर्भ से निकलकर संसद की गरिमा के लिए खतरा न पैदा कर दें। कारण साफ था वाममोर्चा संसद इसलिए चलाना चाहती थी कि वे श्री जस्टीस सेन पर महा अभियोग ला सके। दूसरी तरफ भाजपा ने पहले ही साफ कर दिया था कि वे श्री अन्ना द्वारा प्रस्तावित जन लोकपाल बिल के कई बिन्दूओं से सहमत नहीं है। सत्ता पक्ष को इनके दरार का न सिर्फ लाभ ही मिल रहा है साथ ही सत्ता पक्ष श्री अन्ना को व इनके लाखों समर्थकों को भी कठघरे में खड़ा करने का प्रयास कर रही है। इसी क्रम में कांग्रसी प्रवक्ता श्री मनीष तिवारी जी का श्री अन्ना के प्रति जहर उगलना व केंद्रीय मंत्री श्री सुबोध कांत सहाय ने उन्हैं तो पागल तक कह डाला। जरा आप ही सोचिए यदि मनमोहन सरकार के प्रायः सभी मंत्रीगण जिसमें प्रमुख रूप से श्री कपिल सिब्बल जी, प्रणब दा, अम्बीका सोनी जी और विद्वान वोट बैंक की चिन्ता करने वाले श्री मान् दिग्विजय सिंह जी जैसे समझदारों की जमात भरी हो तो उसकी नैया खुद ही भगवान डूबा देगा। इसके लिए किसी पागल की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। डा.मनमोहन सिंह ने लाल किले से 15 अगस्त को देश के नाम हिन्दी में एक संदेश पढ़ा। उनकी बात विपक्षी सदस्यों को समझ में नहीं आयी या उनकी बात को वे शायद समझ नहीं सके। इसीलिए पुनः अगले ही दिन फिर उनको संसद में आकर बयान देने को कहा गया। विपक्ष सोचते हैं कि वें संसद को कभी न चलने देने के नाम पर, कभी चलने देने के नाम पर, देश की जनता को जिस प्रकार मुर्ख बनाते रहें हैं। उसी प्रकार कभी संसद की व्यवस्था धारा 72, तो कभी 184, कभी गृहमंत्री जी के बयान के नाम पर देश को गुमराह कर देश में लोकतंत्र की रक्षा कर रहें हैं। महिला बिल हो या लोकपाल बिल, कभी सहमति तो कभी असहमति, कभी दुहाई तो कभी गुमराह करते रहते हैं मानो देश की सारी जनता तो अनपढ़ और गंवार है। कुछ समझती तो है नहीं? अब तो ऐसा आभास भी होने लगा कि जो लोग चुन कर संसद में जाते हैं या जिनकी राज्यसभा में लाटरी खुल जाती है वे ही देश के भाग्य निर्माता हैं बाकी सारे लोग या तो पागल हैं या उनके विचारों का कोई मूल्य नहीं है। कारण साफ है देश में संसद की मर्यादा ही सर्वापरि है, इसके बाद देश के मंत्री-संत्री आते हैं जिसकी आवभगत में सारा हिन्दुस्तान पलकें विछाए खड़े रहता है। चुनाव मे जीत क्या दर्ज हो जाती है ये रातों-रात अपने घर की छतों से ही छलांग लगाकर अकाश में पंहुच जातें हैं फिर तो पांच साल देश को लुटने का एक प्रकार से सरकारी आदेश इनकें हाथों में चुनाव आयोग थमा देता है। कभी-कभी राज्यों में भी ऐसा ही देखने को मिला है। जिसमें कुछ वर्षों पहले बिहार और अभी कर्नाटका राज्य में हमें देखने को मिला है। खैर ! प्रधानमंत्री जी संसद में आये एक अंग्रजी में छपा-छपाया अपने बयान की प्रति संसद में खड़े होकर वितरित करवा दिए। उसको पढे़ और चल गये। कारण साफ था न तो विपक्ष में इतनी क्षमता है कि वे प्रधानमंत्री को कह सके कि साहेब अभी जातें कहां है? जनता की बात भी सुनते जाइए न ही इनमें कोई खुद की इच्छा शक्ति ही थी की वे संसद के अन्दर बैठे सांसदों का मान रख पाते। विपक्षी भाषण की कड़ी में एक मात्र श्री शरद यादव के भाषण को छोड़ कर सबने अपनी दाल ही गलाने की चेष्टा की बस। सरकार बार-बार चिल्लाती है कि श्री अन्ना संसदीय कार्यों पर अलोकतांत्रिक तरिके से दबाब बनाने का प्रयास कर रही है। कानून बनाने का कार्य संसद का है। तो किसने कहा कि आप कानून अन्ना जी के घर जाकर बनाऐं। जब लोकतंत्र के रक्षक देश की जनता के साथ अलोकतंत्रिक व्यवहार करने लगते हैं तब-तब देश की जनता सामने हो मुखर होती रही है। सरकार को देश के विकास की चिन्ता अचानक से सताने लगी। मंहगाई सर उठाकर सीना ताने खड़ी है। भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पार कर चुका है। देश के प्रधानमंत्री जी खुद अर्थशास्त्री हैं इसलिए देश की अर्थ व्यवस्था भी इनके चिन्ता का कारण है। इन सबमें सबसे बड़ी चिन्ता इनको लोकतंत्रिय ढांचे को चुनौति की है। जब इतनी सारी चुनौतियों का सामना इनको करना ही था तो एक नई चुनौति और क्यों पैदा कर ली सरकार ने। अभी भी समय है कि संसद के बेइमानों को विश्वास में न लेकर प्रधानमंत्री जी जनता को विश्वास में लें। संसद का अर्थ होता है लोकतंत्र और लोकतंत्र में जनता सर्वोच्य होती है न कि मंत्रिमंडल। बाबा रामदेव को जिस लाठी से आपके शातिरों ने हांकने की चेष्टा की उसी रणनीति को आप अन्नाजी पर प्रयोग करने की भूल कर रहें हैं। संभवतः कहीं यह आपकी सरकार की कब्र न खोद डाले। मेरे बहुत सारे पत्रकार संपादकों ने भी यह प्रश्न खड़ा किया कि ‘‘पांच सदस्यों की टीम की बात आखिर क्यों सुनी जाए? इस प्रकार तो हर कोई खड़ा होकर बोलने लगेगा कि अमूक कानून बनाओ।’’ भाई! या तो इनलोगों ने अपनी कलम को सरकार के पास गिरवी कर रखी है या फिर इनका दिमाग खाली हो चुका है। देश में पाँच की बात तो छोड़िये जनाब एक दो राज्य सरकारें भी मिलकर चेष्टाकर के दिखा दिजिए की वे संसद से अपने मन चाहा कानून पास करवा लेवें। महिला बिल पर पूरी संसद एक है सिर्फ 20-25 सांसदों ने धमकी क्या दी सरकार ने अपने कदम पीछे खींच लिए। जिस बात को लेकर ये लोग बहस चला रहें है उसमें जयप्रकाश जी के आन्दोलन से अन्ना के आन्दोलन की तूलना भी की जा रही है। शायद या तो ये लोग जानबूझ कर अनजान बने हुए हैं या सोचते है कि वे जो कहते हैं जनता सिर्फ इतना ही पढ़ती और जानती है। cont.. http://shambhuchoudhary.jagranjunction.com/

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PLEZ GIVE THE COMMENTS CAG slams Congress government and Navy for the Gorkshkov deal. By clinching the deal to buy the second hand Aircraft carrier which is almost done its half life, the government has "negotiated and agreed" to pay a huge amount of US$ 2.9 billion in 2009, even though it was originally agreed to buy it for US$ 800 million. CAG also questioned the requirement to buy a second hand used Aircraft carrier ship at a higher cost than that of a new Aircraft carrier ship. During the negotiation by the government for 4 years, the cost has gone up by Rs 7,207 Crore. What a wonderful congress negotiation.2009 90 million cash for vote scam by congress to save government: BJP party members were offered 90 million for abstaining the trust vote in parliament and given 10 million in advance. Three MP's brought the money they got into the parliament and had accused Samajwadi Party general secretary Amar Singh and Congress president Sonia Gandhi’s political secretary Ahmad Patel of offering them bribes to abstain.2008 Parliament attack culprit Afzal Guru leading his luxury life in Indian Jails, inspite of Supreme courts order to hang him long back. Playing the dirty vote bank politics, congress is feeding the terrorists organization in this country.2006 Oil for food scam : As per the Pathak report tabled in parliament on August 2006, on Iraqi Oil for food scam, congress external affairs minister Natwar Singh had sent a letter asking Iraqi Oil Minister to give "full assistance and cooperation to Andaleeb Sehgal", allowing his company Hamdaan Exports Ltd to get a commission of 193000 dollars in illegal contracts. The circle becomes complete when Natwar Singh's son Jagat Singh tied nuptial knot on 07/07/07 with Somaya, sister of Andaleeb Sehgal. Andaleeb Sehgal is named in the UN’s Paul Volcker report and is accused of paying kickbacks to the tune of $7,50,000 to the Saddam Hussein regime through his company Hamdan Exports on behalf of Natwar Singh and the Congress party. He is accused of having deposited the money in the Jordan National Bank, which was accessed by Saddam. One of congress's International level corruption. 2006 Congress Beuro of Investigation (CBI). Here is interesting statistic from NHRC on fake encounter cases disposed during 2004-2005. Gujarat had just 1 fake encounter case while congress ruled AP had 5, SP ruled UP had 54, congress ruled Haryana had 4. While Gujarat only 5 encounter cases pending, Congress ruled AP had 21, Congress ruled Maharashtra had 29, SP ruled UP had 175, the National Capital Delhi had 18 despite Sonia Gandhi and Manmohan Singh at the helm and Congress ruled Uttaranchal had 14. Why are we not talking about other states?2005 Telecom scam by Congress's telecom minister Sukhram of the turn of 3-4Crores, CBI even recovered 1 Crore + from his house. Because of his acts, the PSU ITI is in the verge of closure.1996 Urea scam. PV Prabhakar Rao, son of PV Narasimha Rao of congress was arrested for siphoning off 133 Crore rupees which was meant to import Urea for the ailing farmers. Not even 1KG of ureas was imported with this money, but the money is swallowed by the greedy congress.1996 Sister Abhaya murder case: Sister Abhaya found murdered in Payas Tenth Convent on 27th March 1992. Mr. Varghese P Thomas DSP of CBI had to quit from CBI, as his conscience was not allowing to continue with Abhaya Murder case, he also mentioned that political pressure from congress's PV Narasimha Rao's office as one of the reason for him to quit. Because of pressures from Media and Action councils, CBI had to finally change their stand from Suicide theory to murder angle and Sister Sephy and Father Jose Poothrikkayil were arrested after long 17 years of various CBI and local police enquiries. Illicit affairs in the Convent between fathers and sisters of convent and Abhaya's knowledge on this is accused to be the reason for her murder. CBI misused by congress, and crores of tax payers money spend by delaying and diverting the probe.1993 JMM Cash for vote scam. It is accused that 5Million each paid for 4 JMM MP's by congress to save the congress government at Centre upon the "No confidence Motion" put on vote on July 1993. With the total Lok Sabha strength of 528, and congress having just 251 MP's finally managed to defeat the motion by 265 votes against and 251 voting in favour of the no confidence motion. There were various en-queries and debates, but all the top leaders of congress like PV Narasimha Rao, Bhuta Singh, managed to escape in the absense of evidence. But earlier income tax department had attached the properties worth 20 Million belonging to four JMM leaders. Smoke without fire?1993 India's failed foreign policy - involvement in Sri Lanka and LTTE: While Kashmir issues and boarder issues with China still unresolved, Rajeev Gandhi sent Indian Army to help Sri Lankan Army to suppress the pro-tamil LTTE activities in Sri Lanka. Result, IPKF did not succeed in the intended goal and suffered casualties of 1255 Indian Soldiers and many more injured and also killed around 7000 pro tamil LTTE cadres. Of late Sri Lanka had resolved the LTTE issue, but when can we see India resolving Kashmir, North East issues?1987 Anti Sikh Riot killing between 10000-17000 Sikhs in this country. Congress's leader Sajjan Kumar and fellow congress leaders lead the riot. Rajeev Gandhi commented " When a big tree falls earth around it will shake" referring the killings of thousands of Sikhs. What a cruel comment.1984 Bhopal Gas tragedy: More than 5 Lakh people affected with 8000+ immediate death. Congress helped to escape the Chief of Union Carbide to escape in special escorted flight to US. 1984 To be continued……

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Who is THE pioneer of scams in india? 1 Jawaharlal Nehru 1947–1964 Jeeps scam - VK Krishna Menon, Rs. 80,00,000, 1955 Cycles scam - SA Venkataraman, 1951 BHU scam- Authorities of Banaras Hindu university, Rs. 50,00,000, 1956 Mundra scam - Haridas Mundra, Rs.1.25 crores, 1957 Teja loan scam - Jayanth Dhramateja, Rs. 22 crores, 1960 Kairan scam, Pratap Singn Kairan 1963 2 Lal Bahadur Shastri 1964-1966 Biju Patnaik corruption, Biju Patnayak, 1965 3 Indira Gandhi 1966-1977 Maruthi controversy, Indira Gandhi, Sanjay Gandhi, 1974 Indian oil scam, Indian oil company, 1976 A R Anthule corruption, Rs. 30 crores 4 Indira Gandhi 1980-1984 Churhat lottery scam, Congress minister Arjun singh 5 Rajiv Gandhi 1984-1989 HDW submarine scam, HDW submarine company, Rs. 20 crores, 1927 Bofors scam, Rajeev Gandhi and others, Rs. 64 crores, 1987 Saint Kits forgery, VP Singh Saint Kits first trust corporation, Rs.2.1 crores, 1989 Indian Airlines controversy, Rs.2.5 crores 6 PV Narasimha Rao 1991-1996 Solamki scam, Madhav Singh Solamki who was the foreign affairs minister, 1992 Securities scam, Harshad Mehta, Rs. 5000 crores, 1992 Indian Bank scam, Indian bank chairman M.Gopala Krishna, Rs. 1300 crores, Sugar imports scam, Past Health minister Kalpanth Rai, Rs. 650 crores MS Shoes scam, Pavan Sachdev owner of MS Boots company, Rs. 699 crores, 1994 JMM bribery, JMM P.V. Narasinha Rao government, Rs. 30,00,000, 1999 Lakhubhai Pathak cheating case, Chandraswami and K N Aggarwal, P V Narsimha Rao, $100,000, 1983 Sukram corruption, Sukhram communication minister, 1996 Fodder scam, Bihar Animal Husbandry department, Lalu Prasad Yadav, Rs. 950 crores Urea scam, CS Ram Krishnan, Rs. 133 crores, 1996 Hawala scam, Jain Brothers, US$18 million, 1996 7 IK Gujral 1997 CRB scam, Roop Bansali, 1997 Companies scam, Rs. 330.78, 1998 8 AB Vajpeyee 1998-2004 Mohata scam, Mohata, 1998 Plantation scam, 653 companies, Rs. 2,563 crores, 1999 Match fixing scam, Mohammad Azaruddin, Ajay Jadeja and Manor Prabhakar Coffin scam Ketan Parekh, Ketan Parekh made One lakh fifteen thousand crores of money disappear from the stock market, 2001 Tehelka operation, Military people and political leaders, 2001 Home trade scam, Sanjay Aggarwal, Rs. 600 crores, 2002 Stamp paper scam, Abdul Karim Telgi, Rs. 30,000, 2003 9 Manmohan Singh 2004 till present Oil for food scam, K.Natwar Singh, 2005 Satyam scam, Ram Linga Raju, Rs. 14000 crore. Madhu Koda corruption, Madhu Koda CM of Jharkand, Rs. 4000 crores 2009 MHADA flats scam, Congress government in the state Siachen army ration scam Cash for votes scam, UPA bribed MP's to survive vote of confidence, 2008 IPL scam Sukna land scam 2G scam, A Raja Telecom minister, 176,379 crore, 2008 Karnataka landscam Commonwealth games scam Adarsh society scam, Maharashtra State Government Congree-NCP Alliance, 2010 ISRO Devas scam Pune landscam Fake pilots scam

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सावधान ऐसे लेखको से । ये लोग भ्रष्ट कोन्ग्रेसी होते है जो धर्म का खजाना लूटना आसान हो जाये ईस के लिये गलत प्रचार करके लोगो को तैयार करते है विरोध नही करने को । यातो ये वो लोग होते है जो हिन्दु धर्म को निचा दिखाकर धर्म को हानि पहुचाना चहते है । ये भ्रष्ट लोग मानते है की टाई कोट पेहनने वालो का ही अधिकार होता है कमानेका और धन ईकठ्ठा करने का । भगवा कपडा पेहन लिया तो कमाने का अधिकार ही छीन लेना चाहते है । ये फोकटिये लोगो को सब फोकट मे ही चाहिये । इनके आकाओने आदमी के सांस लेने पर भी टेक्स लगा दिया है और इन को धार्मिक बाबते फोकट मे चाहिए । किसी की ज्यादा सम्पत्ति देख ईर्शा से जल कर माओवादी बनजाते है । हिसाब किताब करने बैठ जाते है । ईतने से ये हो सकता था और ईतने से ये हो सकता है । अपने आकाओ की सम्पत्ति नही गिनेन्गे ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya

पुलिस क्या ही क्या इस देश में तो राजनेताओं ,को और भी बुरा हाल है ,व्यायामशाला को जाने दें सरकार योग व् असनो को ही जरूरी कर दे तो एक भी पैसा खर्च नहीं होगा और ये सब एक साल में ही चुस्त दुरुस्त हो जाएँगे| अब सवाल ये है की अनिवार्य करेगा कौन ,क्यों की ये तो आर,एस .एस का अजेंडा हो जायेगा ,वोट खिसक जायेंगे ,जब गीता पढने से भी [कर्णाटक] इन सेकुलर जमात को खतरा दिखाई देता है तो इनका तो भगवन ही मालिक है | भाई जब तुम विदेशी संस्कृति से परहेज नहीं करते तो कम से कम अपनी संस्कृति की स्वास्थ्यवर्धक बाते तो अपना लो (.हींग lage न फिटकरी रंग चोखा होई ) अगर सरकार योग और प्राणायाम को जरूरी कर दे तो सुरक्षा बालो का मनोबल,चरित्र ,स्वास्थ्य सब कुछ श्रेष्ठ होगा |

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Rahul Gandhi - "it was virtually impossible to stop all terrorist attacks." I agree with the statement because most of the times attackers comes from inside only, but not thinking about the future attacks if we think about the past attacks, What congress is doing in favor of the country they are protecting terrorists, taking care of them. Afzal Guru and ajmal kasab are only few names to say and all things comes as a open book. Afzal Guru, was convicted of conspiracy in the December 2001 attack on the Indian Parliament and was sentenced to death by the Supreme Court of India in 2004. The sentence was scheduled to be carried out on 20 October 2006. Afzal was given a stay of execution and remains on death row. Mohammed Ajmal Amir Kasab has been sentenced to death for attacking Mumbai and killing 166 people on November 26, 2008 along with nine Pakistani terrorists. He was found guilty of 80 offences, including waging war against the nation, which is punishable by the death penalty. Congress talks about Maulana Masood Azhar who was released In December 1999, he was freed by the Indian government(NDA) in exchange for passengers on the hijacked Indian Airlines Flight 814 (IC814). Is congress also waiting for a hijack to be done or INC itself planning for an event like Hijack to release these terrorist.Congress is waiting for how many evidence to prove these terrorist guilty. For most of the years since independence, the federal government has been guided by the Indian National Congress (INC), From 1950 to 1990, barring two brief periods, the INC enjoyed a parliamentary majority. The INC was out of power between 1977 and 1980, when the Janata Party won the election owing to public discontent with the corruption of the then Prime Minister Indira Gandhi. In 1989, a Janata Dal-led National Front coalition in alliance with the Left Front coalition won the elections but managed to stay in power for only two years. As the 1991 elections gave no political party a majority, the INC formed a minority government under Prime Minister P.V. Narasimha Rao and was able to complete its five-year term. The years 1996–1998 were a period of turmoil in the federal government with several short-lived alliances holding sway. The BJP formed a government briefly in 1996, followed by the United Front coalition that excluded both the BJP and the INC. In 1998, the BJP formed the National Democratic Alliance (NDA) with several other parties and became the first non-Congress government to complete a full five-year term. In the 2004 Indian elections, the INC won the largest number of Lok Sabha seats and formed a government with a coalition called the United Progressive Alliance (UPA), supported by various parties.[5] In the 2009 Lok Sabha Elections, it won again with a surprising majority, the INC itself winning more than 200 seats. I Come to remember a line from movie SHAHID BHAGAT SINGH - Congress wants to be in government only by hook or by crook. they have no interest in public's views and favor. INC is the first party to make an alliance to be in government

के द्वारा: akhil akhil

राष्ट्र, अटल और मौन पर मीडिया के मौन से खड़ा सवाल अटल जैसे राष्ट्रवादी व्यक्ति का काले धन पर स्वामी राम देव के  आन्दोलन और मां गंगा में अवैध खनन जैसे अनेक मुद्दों पर देश की जनता अटल जी के विचारों को जानना चाहती थी। पूर्व प्रधान मंत्री आदरणीय अटल बिहारी बाजपेई के राष्ट्र भक्ति पर फिलहाल देशवासियों में कोई शक नहीं है परन्तु अटल जी के मौन से हम  जैसे लोगों के सामने यश प्रश्न खड़ा हो गया है कि आखिरकार अटल जी मौन क्यों हैं। वे क्या कुछ बोलने की स्थित में नहीं है ( स्वास्थ्य कारणों से या कोई और कारण है)। ----- धार्मिक कहे जाने वाले देश भारत का चरित्र हम सबके सामने है।  कहीं पर काले धन के नाम पर स्वामी राम देव के आन्दोलन को  दक्षिण पंथी पाटियां खुलकर सामने आयीं, वहीं उत्तराखंड में स्वामी  निगमानन्द की शहादत पर यहीं दक्षिणपंथी पार्टियों का चेहरा हम सबके सामने है। ---- मां गंगा में अवैध खनन के विरोध में हरिद्वार में स्वामी निगमानंद की मौत पर आखिरकार सवाल क्यों नहीं उठे। उत्तराखण्ड की भाजपा की हुकूमत  केन्द्र की यूपीए सरकार से काले धन के सवाल पर आमरण  अनशन पर बैठे स्वामी रामदेव की जान बचाने की जुगत लगायी, जिसे  अच्छा कहा जा सकता है पर मां गंगा में खुद के अवैध खनन पर रोक  लगाने में आमरण अनशन पर स्वामी निगमानन्द की मौत को रोकने  में विफल रही है। --  प्रमोद कुमार चौबे  09415362474

के द्वारा: pramod pramod

अन्धेर नगरी गन्डु राजा अन्धी प्रजा । सभ्य समाज मे कोई लडकी की उमर पूछना असभ्यता है वैसे ही किसी का पगार पूछना भी असभ्यता है । जनता का कोइ अधिकार नही बनता बाबा की सम्पत्ती जान ने का । बाबा को एक कानी कोडी भी दी नही दान मे और चले मुरारी बाबा की सम्पत्ती जानने ? धन काला है या गोरा वो सरकार और बाबा के बीच का मामला है । बाबा के पास जो धन है वो दान से आया है, दान लेना चोरी नही है । ईतना ज्यादा दान ? यदि ईर्षा से आपकी आन्खे फटती हो तो बाबा क्या करे ? रात दिन शारीरिक मेहनत योग सिखए । अपनी मेहनत का पैसा लिया ईसमे बुरा क्या है । आप ईर्षा से जलकर बोलोगे शारीरिक मेहनत का ईतना ज्यादा पैसा हमे तो कोइ १०० रुपिया भी नही देता । सचीन और सलमनखान से जा के पूछो उसका चपरासी थप्पड मरके भगा देगा । आपके शरीर की बाजार किमत शून्य है, बबा, सचीन और सलमान के शरीर वल्यु भारी है । बाबा ने आज अपना धन जाहीर किया ऐसा भी नही है । महिनो पहले टी.वी. मे आपकी अदालत नामके प्रोग्राम मे बाबा बेलेन्स्शीट लेके आये थे । और उसी समय बाबा ने ११ करोड की बात कही थी । क्या उसी समय कोइ भ्रष्टाचारी ने टी.वी. नही देखा । ७-८ महीना धन गोरा रहा दिल्ली की घटना के बाद काला हो गया ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya

बाबा राम देव की संपत्ति का हिसाब तो रख रहे हैं और अपनी प्रतिक्रियाएं भी दे रहे हैं परन्तु यह सोचने को तैयार नही की बाबा ने यह संपत्ति किसी राष्ट्रद्रोही गतिविधि से नही कमाई है/ जिस प्रकार नेता लोग बार बार अपने को जनता द्वारा चुना हुआ नुमायिन्दा बता रहे हैं और साफ़ साफ़ कह रहे हैं की वे राजा हैं/ठीक इसी प्रकार बाबा को यह धन दान से मिला है अब चाहे उन्होंने शारीरिक व्यायाम बेचा ही या आयुर्वेदिक औषधियां बेचीं हों.जब उनके अनुयायियों को कोई आपत्ति नही है तो औरों को क्यों? ऐसा कौन सा व्यापारी या सरकारी कर्मचारी या मीडिया वाला ही है जो ईमानदार हो ,सब के पास कला धन है और खूब है,परन्तु अपनी और देखने को तैयार नही हैं बस दुसरे को गाली बकने से बाज नही आ रहे हैं/ अन्ना हजारे या बाबा राम देव के साथ एक सौ इक्कीस करोड़ लोगों में से कितने लोग खड़े हुए/ मात्र मुश्किल से हजारों की संख्या में या ज्यादा से ज्यादा एक लाख लोग ,कितने बड़े शर्म की बात है की एक सौ इक्कीस करोड़ लोग भ्रष्टाचार रोग से पीड़ित हैं परन्तु रोग को भगाने को तैयार नही/ यह समय बाबा की संपत्ति को आंकलन करने का नही बल्कि भ्रष्टाचार से कैसे निबटा जाय यह महत्वपूर्ण है/ पांच सौ तिरालिस सांसद एक सौ इकीस करोड़ पर भारी पद रहे हैं और एक सौ इक्कीस करोड़ लोग इस भयंकर बिमारी की चपेट में हैं जिसमे केवल कुछ हजार लोग इस बिमारी को भगाने को लड़ रहे हैं और एक सौ बीस करोड़ निन्यानवे लाख एक लाख लोगों की कुर्बानी से लाभान्वित होना चाहते हैं इससे बड़ी शर्म की बात और क्या होगी?जिन लोगों ने बाबा की संपत्ति पर आपत्ति दर्ज कराई है मैं उनसे एक बात पूछ्नु चाहती हूँ की उन लोगों ने कभी किसी गरीब को दो पैसे दान दिए हैं,कभी किसी भूखे को एक वक़्त की ही रोटी खिलाई है या कभी किसी प्यासे को ही एक घूँट पानी पिलाया है अरे जब खुद कुछ करने को तैयार नही तो जो कुछ भी थोडा बहुत एक बाबा कर रहा है उसको करने दो / कम से कम तुम्हारे लिए लड़ तो रहा है/ खैर बाबा को या अन्ना को बदनाम करने से पहले लोगों को अपने अंतःकरण में पहले देखना चाहिए /

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आप क्या समझते हैं कि यह परीक्षा पूर्णतः सत्यता पर आधारित है ? नही नही क्योंकि इसकी गुणवत्ता निसंदेह संदेहास्पद है क्योंकि इसके उत्तर की ओ एम् आर शीट में उत्तर के सामने वाले गोलों में पेन्सिल से निशाँ लगाया जाता है जिसको बाद में मिटाया भी जा सकता है?आखिर ऐसा होता भी है?चूंकि पटना का सुपर थर्टी कोचिंग संसथान लोगों की निगाहों में है इसलिए इस बार २४ बच्चों को उत्तीर्ण दिखाया है वर्ना या खेल ही सारा कोचिंग माफियाओं का है/यह परीक्षा भी वास्तव में कोचिंग माफियाओं की ही है क्योंकि उनका भविष्य दांव पर लगा होता है/खैर अब रिजल्ट आ गया है दो चार दिन में ही इनके बड़े बड़े विज्ञापन आने शुरू हो जायेंगे/जिनमे उत्तीर्ण छात्रों के फोटो भी छपे होंगे और साथ में यह भी लिखा होगा कि वह छात्र दो साल का रेगुलर कक्षा वाला कोर्स कर रहा था क्या यह संभव है कि एक छात्र एक वक़्त में कोटा दिल्ली या पटना में भी कोचिंग कर रहा हो और अपनी ग्यारहवीं बारहवीं की रेगुलर कक्षा भी अटेंड कर रहा हो,कहीं कहीं तो घोटाला अवश्य है फिर ज्यादातर जेनरल केटगरी के ही अमीर बच्चे क्यों सफल होते हैं गरीबों की संख्या न के बराबर है/क्योंकि कहीं न कहीं इस परीक्षा में कोचिंग माफियाओं का खेल अवश्य है/अगर सी बी ई जाँच करायी जाय और करना भी कुछ नही बस पिछले तीन साल के उत्तीर्ण छात्रों की ओ एम् आर शीट ही जांच ली जाय कि कहीं इसमें कुछ कारस्तानी तो नही हुई है अगर हुई है तो जाँच का दाएरा बढ़ाया जाय/क्या कारण है को कोचिंग वाले परीक्षा के बाद सक्रिय हो जाते हैं और तो और पूरे साल की पढ़ाई एक तरफ और परीक्षा से कुछ ही दिन पहले वह पढ़ाते हैं जो सरे साल नही पढ़ाया होता है?दिल्ली और कोटा के कोचिंग संस्थानों और आईआईटी रिजल्ट की क्या सहमती है आखिर इसकी निष्पक्ष जांच अति आवश्यक है/आपने बहुत सही मुद्दा उठाया है/आपको बधाई !!!!

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आज की तारीख में ये बात पढकर या सुन कर किसी भी तरह का अचम्भा नहीं होता है की \"हम उस देश के वासी है जिस देश में भ्रस्टाचारी और भ्रस्टाचार रहता है\" कियोकी ये हम हिन्दुस्तानियो का सरल स्वाभाव है की हम कुछ भी हो जाए पर हम अपने पूर्वजो द्वारा दी गयी नसीहतो का पालन अवश्य ही करेंगे जैसे की \" पापी से नहीं पाप से नफरत करो\" परन्तु दूसरी नसीहत के मुताबिक \" छमा करना मानवता की निशानी है \" तो इन सब नसीहतो के चलते हम हिन्दुस्तानियो ने क्या कुछ नहीं झेला, जब हमने विदेशियो के अत्याचारों को बर्दाश्त किया है जिसका की इतिहास गवाह है तो भाई ये तो तब भी अपने ही है, अगर राजा जी, कलमाड़ी जी, या फिर थोडा सा पीछे जा कर देखे तो इस तरह के अनगिनत ज्वलंत, सशक्त, सार्थक, शक्तिमान ऊँचे राजनीतिक व सरकारी पदों पर आसीन भूत, भविष्य के \" एक ढूदो हज़ार मिलते है\" महान विभूतिया हमारी भारत माता की गोद से जनम ले चुकी है. और अपने एक से एक बड़े से बड़े कारनामे कर चुकी है. अब बात ये है की अगर अपने पूर्वजो के मार्ग का अनुसरण करते हुए अगर राजा जी ने कुछ नया कारनामा कर दिखाया तो श्रीमान जी हम तो ये कहेंगे की \" हंगामा क्यों है महफ़िल में थोड़ी सी जो पी ली है, चोरी तो नहीं की है डाका तो नहीं है डाला\" और फिर आप लोग बात की गहराई में जाये बिना ही बात का बतंगड़ बना देते हो \" अरे भाई राजा हो या कलमाड़ी इनमे कोई सुपरमेन तो है नहीं की घोटाले करेंगे तो सारी मलाई ये ही खा गए हो आप लोग इस बात को समझने की चेष्टा क्यों नहीं करते कि इनके ऊपर इनके भी बॉस बैठे है असली मलाई का भगोना तो उनके हाथ आया और फिर दुनिया में मेहनत नाम कि भी तो कोई चीज़ होती है तो इन मुसीबत के मारो ने जो मेहनत कि तो इनके हिस्से में तो मलाई कि कटोरी हाथ आई और आप लोगो है कि इन बेचारो को चोर , भ्रस्टाचारी, देशद्रोही और न जा ने क्या क्या अनाब शनाब बकते हो. अरे कुछ तमीज सीखो भला ऐसे कारनामे करने वालो को ऐसे अपमानसूचक शब्दों से अपमानित किया जाता है, क्या ये ही हमारी रास्ट्रीय सभ्यता है न भाई न, हमे आप से ऐसी उम्मीद नहीं है, आप एक संभ्रांत भारतीय हो ऐसी बाते तो हम अपने से अलग हुए पाकिस्तान के लिए भी नहीं करते फिर आप ये भी तो गौर कीजिये कि जिन्हें आज आप गलत कह रहे हो कल वो हमारे संविधान के द्वारा इस्थापित विधि के द्वारा माफ़ कर दिए जायगे और आप नहीं तो आप के दुसरे राज्य के भाई बहिन ही उनको अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए भारत कि विशाल संसद में दुबारा सांसद निर्वाचित करके भेज देंगे, फिर आप क्या करंगे? तो इस लिए \" बीती ताहि बिसर दे अब आगे कि सुध ले\".

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आदरणीय एस.पी. सिंह जी, महोदय, आपकी जिज्ञासा उचित है और इसीलिए आपकी समस्या का समाधान सरल शब्दों में प्रस्तुत किया जा रहा है. “सूपड़ा साफ़ होना” मूल रूप से क्षेत्रीय शब्दावली है जिसे एक मुहावरे के रूप में प्रयुक्त किया जाता है. हिंदी के खड़ी बोली प्रारूप में ऐसे किसी मुहावरे का उल्लेख नहीं मिलता किंतु इसका चलन सामान्य बोलचाल में अकसर होता रहा है. इसका अर्थ है ‘सिरे से साफ होना’ यानि यदि कोई चीज पहले से अस्तित्व में हो लेकिन किसी कारणवश उसका अचानक लोप हो जाए तो उसके लिए ‘सूपड़ा साफ़ होना’ मुहावरे का प्रयोग किया जा सकता है. और यही कारण है कि इस शब्द समूह को असंसदीय नहीं माना जाता और मीडिया में जनसामान्य की भाषा के रूप इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जाता है. जागरण जंक्शन पर ब्लॉगिंग के लिए आपका आभार. धन्यवाद जागरण जंक्शन टीम

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सम्मानित जागरण न्यूस ब्लाग टीम द्वारा पांच राज्यों की चुनावी झांकी बहुत ही सुन्दर ढंग से प्रस्तुत की है जिसके लिए पुरी टीम बधाई की पात्र है ? आदरणीय बंधुओं मैं एक सेवा निवृत वरिष्ट नागरिक हूँ - चुनाव की हलचल बचपन से ही देखता रहा हूँ पहले समाचार पत्रों में फिर रेडियो के समाचार द्वारा अब मुख्या रूप से टी वी के द्वारा चुनाव प्रचार से लेकर परिणाम तक खूब गहमा गहमी रहती है ओपिनियन पोल से एक्सिट पोल तक की चर्चा होती है पर किसी पार्टी इतनी बुरी हार होती है की उसको एक दो सीट या एक भी सीट नहीं मिलती तो एक शब्द का प्रयोग किया जाता जैसे ======= "तमिलनाडु के पड़ोसी राज्य पुडुचेरी में आल इंडिया एनआर कांग्रेस (एआइएनआरसी) और अन्नाद्रमुक गठबंधन ने कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर दिया." ---- अब या तो यह कोई तीसरी दुनिया का शब्द है या यह पत्रकारों द्वारा बनाया गया है मेरी समझ में यह शब्द आज तक नहीं आया है - इस लिए मैं आपकी टीम से ही यह समझना चाहता हूँ की इस शब्द " सूपड़ा साफ़ होना " का शाब्दिक /वास्तविक व्याहारिक अर्थ क्या है क्या यह "संसदीय शब्द " है - अगर उत्तर देंगे तो आपकी कृपा होगी - धन्यवाद.

के द्वारा: s p singh s p singh

केवल गुलाम मानसिकता इससे बड़ा गुलामी का और क्या सबूत होगा कि भारत का सारा इलेक्ट्रोनिक मीडिया केवल इन विदेशियों की शादी का सजीव प्रसारण दिखा रहा था / अगर ब्रिटेन का राजकुमार खुले आम अपनी प्रेयसी का चुम्बन लेता है तो मीडिया ताली बजाता है और जब यही काम इमरान हाश्मी करता है तो अश्लीलता की श्रेणी में आता है/ यह दोहरा चरित्र आखिर क्यों?चन्द रुपियों की खातिर मीडिया ने राजकुमार की शादी का सजीव प्रसारण दिखाकर ना केवल गुलाम मानसिकता प्रदर्शित की बल्कि देश के लोगों का अपमान भी किया/ ऐसा कौन सा बड़ा काम हुआ था या यह कोई कौन सा समाज सेवा का काम था या इससे किसी गरीब का भला होना था या यह कोई अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान प्रतियोगिता हो रही थी,जिसका सजीव प्रसारण करना जरुरी था / क्या भारत में कोई किसी जगह अच्छा काम नही हो रहा था इससे अच्छा तो यह होता कि अन्ना हजारे की ही मीटिंग का सजीव प्रसारण कर देते ताकि लोग अपने देश की स्थति के बारे में तो सोचते/ अतः यह प्रसारण किसी भी दृष्टिकोण से उचित नही ठहराया जा सकता/ डॉ मनोज दुबलिश

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प्रबुद्ध जागरण जंक्सन के सम्मानित प्रस्तोता ,,हालांकि मुझे टिप्पणी देने पर किंचित झिझक भी मह्शूश हो रही है कि नव धर्मनिर्पेक्छ लोग इसे धर्मान्धता से जोड़कर न देखें ,,परन्तु सत्य तो सत्य ही होता है भारत सदैव से ही हर धर्म के प्रति सहिष्णु रहा है,, महोदय पाकिस्तान जिसका अस्तित्व ही धार्मिक कट्टरता का प्रतीक है वहां की यह खबरें हमे चौंकाती नही हैं ,,केवल सोचने पर बाध्य करती हैं ,,परन्तु भारत तो अपना देश है फिर यहाँ के नागरिकों से एस तरह का सौतेला वयवहार क्यों ? पश्चिम बंगाल में दस वर्षों में जनसंख्या की वृध्दि की दर 200 प्रतिशत रही है,,कुछ जिलाधिकारियों ने अपनी ओर से अपने क्षेत्र की जनसंख्या का आंकडन करने का प्रयाश किया गया कि यह विस्फोट उनके छेत्र में क्यों हो रहा है तो उनका स्थानांतरण कर दिया,,? शायद यह आंकडन धार्मिक कट्टरता का प्रतीक था ? गंगासागर से सटे क्षेत्रों में खुलेआम गोमांस की बिक्री होती है,,जहाँ देश के अन्य तीर्थ स्थलों में गोमांस की बिक्री निषिद्ध है वहीं यह क्षेत्र इसका अपवाद है क्यों ? 1971 के बाद से बांग्लादेश से आये बहुत से हिन्दुओं का नाम मतदाता सूची में नहीं है और यदि उन्हें नागरिक का दर्जा दिया भी गया है तो पिता का नाम हटा दिया गया है,,जबकि कुछ विशेष लोगों के प्रति देश अत्याधिक उदार हो गया ? महोदय बहुत से ऐसे कतु सत्य हैं ,,जिन्हें जागरण जंक्सन भली भाँती जानता है उपरोक्त सन्दर्भ में भी बहुत सी ऐसी बातें हैं जिसे मैने मंच पर लिखना उचित नही समझा ,,आशा है यह चतुर्थ स्तम्भ इस तरफ अवश्य ध्यान देगा .........................जय भारत

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