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कौन है माही की मौत का कसूरवार ?

Posted On: 25 Jun, 2012 न्यूज़ बर्थ में

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mahi dead Mahi Dead

भारत देश में यह आम लोगों की बेबसी ही कही जाएगी जहां पर खास लोगों को वरीयता देकर आम लोगों के जीवन को ताक पर रखा जाता है. एक तरफ जहां भारत में देश का पहला नागरिक चुनने के लिए जोड़-तोड़ की राजनीति अपने चरम पर है वहीं दूसरी तरफ हरियाणा के मानेसर में गर्त में समाई माही को बचाने की 86 घंटों की जद्दोजहद आखिरकार असफल साबित हुई. माही के मरने के साथ आम लोगों की दुआएं भी पाताल में समा गईं जहां माही जीवन-मरण के भंवर में फंसी हुई थी. उनके मरने के बाद चैनलों की उम्मीद भी समाप्त हो गई जो इस इंतजार में पिछले तीन दिन से इस न्यूज को कवर कर रहे थे कि माही जिंदा वापिस आएगी और वे इसकी खबर देशवासियों को सुनाएंगे. लेकिन किसी को क्या पता था कि जिस दिन माही का जन्म था उसके तीन-चार घंटे बाद ही वह हमें छोड़ कर चली गई थी.


राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे गुड़गांव जिले के मानेसर में 70 फुट गहरे बोरवेल में फंसी पांच साल की माही को जब तीन दिन की मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया तो उसकी मौत हो चुकी थी. बाहर निकालते ही उसे एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया. चिकित्सकों की मानें तो माही की मौत उसी दिन हो गई जिस दिन वह बोरवेल में गिरी थी.


बुधवार देर शाम (20 जून) को खेलते वक्त माही बोरवेल में गिर गई थी. उस दिन माही का जन्मदिन भी था. ये हादसा जन्मदिन मनाने के वक्त हुआ. माही के परिवार का कहना है कि करीब रात 11 बजे ये हादसा हुआ. रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए जिला प्रशासन की टीम और आर्मी के जवान मौके पर पहुंचे. बच्ची तक पहुंचने के लिए जेसीबी मशीन की मदद से गड्ढा खोदा गया. इस पूरे अभियान पर मीडिया के माध्यम से पूरे देश की नजर थी. अंत में वह दिन आया जहां यह खबरें आने लगीं कि सेना कुछ ही घंटों बाद माही के पास पहुंच जाएगी लेकिन परिणाम कुछ और निकला. सेना माही के पास पहुंची लेकिन खबर उसके जिन्दा रहने की नहीं बल्कि उसके मौत की आई.


उस दिन एक और मौत

जिस दिन पूरा देश माही की मौत के शोक में डूबा हुआ था उसी दिन पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले से भी ऐसी ही दुखद खबर आई है जहां 15 साल का रोशन 70 फीट गहरे कुंएं में गिर गया था लेकिन 11 घंटे की जद्दोजहद बाद वह मृत पाया गया.


मौत के कुएं में अब तक कितने माही चपेट में आए

साल 2006 में कुरुक्षेत्र में पांच वर्षीय प्रिंस को कौन भूल सकता है जब सेना और प्रशासन की सहायता से घर के पास खुले 60 फीट गहरे बोरवेल से 40 घंटे की कड़ी मशक्‍कत के बाद उसे बचाया गया. तब उस समय पूरे प्रशासन पर कई सारे सवाल उठाए गए लेकिन प्रशासन के व्यवहार में कोई सुधार नहीं आया. प्रिंस के बाद बच्चों का बोरवेल में गिरने का सिलसिला लगातार जारी रहा. प्रिंस के बाद भी कई बच्चों ने अपनी जान गंवाई जिसने अब माही भी शामिल है.


ऐसे हादसों पर क्या कहना है सुप्रीम कोर्ट का

ऐसे हादसे रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों सख्त निर्देश जारी किए थे.

  1. बोरवेल खुदवाने के 15 दिन पहले जिलाधिकारी, ग्राउंडवाटर डिपार्टमेंट, स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम को इसकी जानकारी देना जरूरी है.
  2. गांवों में बोरवेल की खुदाई सरपंच और कृषि विभाग के अफसरों की निगरानी में होगी.
  3. बोरवेल खोदने वाली एजेंसी का रजिस्ट्रेशन होना आवश्यक है.

माही की मौत ने कई सवाल खड़े किए हैं कि आखिरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी बोरवेल गैर-कानूनी तरीके से क्यों खोदे जा रहे हैं. बोरवेल खोदने के बाद उसे खुला क्यों रखा जा रहा है. इसके अलावा बच्चों के गिरने के बाद प्रशासन का ढीला-ढाला रवैया भी एक अहम सवाल है. क्या इन सवालों का जवाब देने के लिए प्रशासन और समाज तैयार है? या यूं ही मासूम जिंदगियां अपना दम घोटती रहेंगी.




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