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हाय रे डर, ना हवाई यात्रा ना ऑफिस

Posted On: 13 Jul, 2012 मस्ती मालगाड़ी में

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Facts About Friday the 13th in hindi

20 शताब्दी और टेक्नॉलोजी पर चलने वाली दुनिया में अंधविश्वास का इस कद्र हावी होना कि एक दिन को पूरी तरह अशुभ मानकर ना यात्रा करना और ना ही बिजनेस करना यह दर्शाता है कि चाहे हम कितना भी आगे निकल जाए पर हमारे दिमाग से भूत, भविष्य और भगवान का नशा नहीं उतरने वाला. अब आप आज के दिन यानि 13 जुलाई को ही ले लीजिएं. यूं तो यह दिन भी एक आम दिन की तरह है लेकिन आज है फ्राइडे और साथ में है 13 का साथ. इस मेल को पश्चिमी सभ्यता के लोग बिलकुल सही नहीं मानते.

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friday the 13thयहां से दिखता है “डर”

कुछ लोग इसे महज अफवाह बताते हैं लेकिन आंकडों पर नजर डालें तो साफ होता है कि आज के दिन से पश्चिम के लोग कितना डरते हैं. दुनियाभर की एयर लाइंसेज की ऑफीशियल वेबसाइट्स पर जाकर आप कन्फर्म कर सकते हैं कि हम सच कह रहे हैं. इस दिन के लिए एयर लाइंसेज के पास बहुत कम बुकिंग हैं. इस दिन की फ्लाइट बुकिंग पर फिफ्टी पर्सेट ऑफ दे रही हैं एयर लाइंस.


आलम यह है कि लोग इस दिन घर में घुसे रहते हैं. दूर की यात्रा पर तो छोड़िये, दफ्तर तक नहीं जाते. अमेरिका की ही बात करें तो इस एक दिन के एवज में करीब एक अरब अमेरिकी डॉलर का घाटा वहां के बिजनेस को उठाना पड़ता है, क्योंकि लोग इस दिन काम-धाम छोड़ कर घरों में बंद हो जाते हैं.

Friday the 13th: आखिर क्यूं डरते हैं 13 फ़्राइडे से

आखिर ऐसा क्या होने वाला है? अंग्रेजों की मानें तो हो सकता है दुनिया ही खत्म हो जाए. वैसे भी 2012 में दुनिया के अंत की अटकलें अरसे से चल रही हैं. कहीं कयामत का यह दिन ही तो मुकर्रर नहीं है? अंग्रेज इस बात से भी डरे हुए हैं.


क्या है राज 13 और फ्राइडे का: Friday the 13th – Origins, History, and Folklore

अंग्रेज यानी पश्चिम जगत के लोग 13 और शुक्रवार, दोनों को अशुभ मानते हैं. ऐसा तब से माना जा रहा है, जब से ईसाईयत अस्तित्व में है. और जब 13 और शुक्रवार साथ मिल जाएं तो वही होता है, जो हो रहा है. डर के मारे हाल बेहाल हो रहे हैं अंग्रेज.


क्रिश्चियन मान्यता के अनुसार 13 और शुक्रवार शैतानी फिगर है. यह मान्यता इसलिए है क्योंकि ईसा मसीह को जिस दिन सूली पर चढ़ाया गया था, वो दिन शुक्रवार ही था. हालांकि इस दिन को क्रिश्चियंस ‘ग्रुड फ्राईडे’ के रूप में मनाते हैं, लेकिन इसे अशुभ का प्रतीक मानते हैं. वहीं, जीसस को जिन लोगों ने सूली पर चढ़ाया था, उनकी संख्या 13 थी. उनका कहना है कि 13 का आंकड़ा अपूर्ण है, जबकि 12 पूर्ण आंकड़ा है. साल में महीने 12 होते हैं और दिन में घंटे भी 12, लेकिन 13 अपूर्ण है.


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