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क्या फिर से उम्मीदों के चिराग जल उठे हैं

Posted On: 30 Jul, 2012 न्यूज़ बर्थ में

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anna hazareभ्रष्टाचार के खिलाफ टीम अन्ना का आंदोलन अभी नरम नहीं पड़ा इसका अंदाजा रविवार को जंतर मंतर और इंडिया गेट पर उमड़े जन सैलाब से लगाया जा सकता है. हजारों की संख्या में लोगों ने अपनी छुट्टी के दिन को अन्ना हजारे के नाम किया. पूरे तन-मन के साथ एक बार फिर लोग ‘मैं भी तू भी अन्ना अब तो सारा देश है अन्ना’ का नारा लगाते हुए दिखे. रविवार को उमड़ी भीड़ से हवा के रुख में परिवर्तन देखने को मिला जिसको लेकर चार दिन से अलग-अलग कयास लगाए जा रहे थे.


लोकपाल बिल पर टीम अन्ना का अंतिम दांव


25 जुलाई से जंतर-मंतर पर यूपीए सरकार के खिलाफ टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसौदिया और गोपाल राय अनशन पर बैठे. तब यह उम्मीद जताई जा रही थी कि इस बार भी पहले की तरह जनता का काफी समर्थन मिलेगा लेकिन सच्चाई इससे परे थी. पहले दिन ही जंतर मंतर पर भीड़ पूरी तरह से नदारद दिखी. इक्का-दुक्का लोग ही आंदोलन के समर्थन में आगे आए. बीच में जब रामदेव ने जंतर मंतर का दौरा किया तब उस समय कुछ देर के लिए भीड़ ने झलक दिखलाई उसके बाद फिर गायब हो गई.


इस पूरे घटना क्रम पर मीडिया के साथ साथ सरकार की भी नजर थी. 29 तारीख से पहले सरकार पूरी तरह से सहज महसूस कर रही थी कि आंदोलन का असर ज्यादा नहीं है और जनता ने अन्ना टीम के आंदोलन को नकार दिया है. उधर मीडिया भी सरकार की कही हुई बातों का जाप कर रही थी. क्योंकि उस समय भीड़ जुटाना को सफल आंदोलन की परिभाषा दी जा रही थी. बाबा रामदेव ने भी कहा था कि अगर कोई आंदोलन बड़े बदलाव की बात करता है तो उसे कम से कम एक प्रतिशत आबादी यानि सवा करोड़ लोगों का समर्थन हासिल होना चाहिए. यह उस समय की बात है जब अन्ना हजारे आंदोलन से पूरी तरह से जुड़े हुए नहीं थे अर्थात वह अनशन पर नहीं बैठे थे.


रविवार 29 जुलाई को सरकार को दिए अल्टीमेटम की अवधि समाप्त हो गई थी. समाजसेवी अन्ना हजारे ने दिए गए अपने वचनों के अनुसार जंतर-मंतर पर अपनी टीम के साथ अनशन शुरू कर दिया. पहले दो घंटे कोई भी चहल-पहल नहीं दिखाई दी लेकिन 12 बजे के बाद जनता ने जंतर मंतर की ओर रूख किया. धीरे-धीरे भीड़ बढ़ती गई और शाम होते-होते यह भी भीड़ जन सैलाब में तब्दील हो गई. लगभग हजारों की संख्या में लोग जंतर मंतर और इंडिया गेट पर उमड़े और मीडिया की भी कवरेज बढ़ी.


उमड़ी उई भीड़ से एक तरफ यह कयास लगाए जाने लगे कि जनता अभी भी आंदोलन से जुड़ी हुई है दूसरे आंदोलन को टीम अन्ना पर केंद्रित न करके केवल अन्ना हजारे पर केंद्रित किया जाने लगा. जंतर मंतर की यह भीड़ उन लोगों को भी जवाब है जो यह कह रहे थे कि जनता टीम अन्ना के गलत मंसूबों को समझ चुकी है. इसके अलावा इस भीड़ पर कई तरह के सवाल भी खड़े किए गए जैसे:


1. यह भीड़ रविवार को जंतर मंतर और इंडिया गेट पर छुट्टी मनाने गए लोगों की थी,

2. यह भीड़ केवल अन्ना हजारे का समर्थन करती है टीम अन्ना का नहीं

3. यह भीड़ आगे भी जन सैलाब का रूप लेगी इसमें संदेह है.

4. इस भीड़ से सरकार के रुख में बदलाव आएगा इस पर यकीन करना मुश्किल है.


आने वाले वक्त में यह आंदोलन क्या रूप लेगा यह तो नहीं कहा जा सकता लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि रविवार को उमड़े जन सैलाब के बाद टीम अन्ना का भ्रष्टाचार के खिलाफ बुझती हुई उम्मीद फिर से जल उठी है.


अन्ना आंदोलन में भटकाव


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