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इंदिरा गांधी की हत्या क्या एक भावनात्मक मुद्दा है !

Posted On: 31 Oct, 2013 Others,न्यूज़ बर्थ में

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भारत में मतदाताओं की भावनाओं के साथ राजनीति करना आम बात है. वर्तमान में इससे कोई भी राजनेता अछूता नहीं है. कुछ दिन पहले राजस्थान के चूरू में कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष और गांधी-नेहरू परिवार के वारिस राहुल गांधी ने अपने भाषण में अपनी दादी की हत्या का मुद्दा बनाकर मतदाताओं को भवनात्मक रूप से जोड़ने की कोशिश की, लेकिन क्या इंदिरा गांधी की हत्या का मुद्दा सच में देश के लिए भावनात्मक मुद्दा हो सकता है.


indira gandhi 1ऐसा बताया जाता है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या खुद की गलतियों की वजह से हुई. पंजाब में भिंडरावाले का उदय इंदिरा गांधी की राजनीतिक महत्त्वाकांक्षाओं के कारण हुआ था. अकालियों के विरुद्ध भिंडरावाले को स्वयं इंदिरा गांधी ने ही खड़ा किया था. लेकिन बाद में भिंडरावाले की राजनीतिक महत्त्वाकांक्षाएं देश को तोड़ने की हद तक बढ़ गई थीं. यह वही भिंडरावाले था जिसने बाद में पंजाब में अलगाववादी ताकतों का नेतृत्व किया और जिसे पाकिस्तान ने भी समर्थन किया. भिंडरावाले को ऐसा लग रहा था कि अपने नेतृत्व में पंजाब का अलग अस्तित्व बना लेगा. यह काम वह हथियारों के बल पर कर सकता है.


भिंडरावाले के नेतृत्व में बढ़ती अलगाववादी ताकतों की वजह से पंजाब में अराजकता फैलती जा रही थी. पंजाब में निर्दोष सिख और हिन्दू मारे जा रहे थे. धार्मिक स्थल अपराधियों और हत्यारों के शरणगाह हो गए थे. सिखों और हिंदुओं के बीच नफरत फैलाने का एक सुनियोजित अभियान चलाया जा रहा था.


राजनैतिक विश्लेशकों की माने इंदिरा गांधी की गलती थी कि उन्होंने 1981 से लेकर 1984 तक पंजाब में बढ़ते आतंकवाद के समाधान के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की. वहीं कुछ जानकार मानते हैं कि  इंदिरा गांधी शक्ति के बल पर समस्या का समाधान नहीं करना चाहती थीं. वह पंजाब के अलगाववादियों को वार्ता के माध्यम से समझाना चाहती थीं लेकिन जब परिस्थितियां बिगड़ी तो अंत में उन्हें सेना की कार्यवाही करनी पड़ी.


ऑपरेशन ब्लू स्टार

पंजाब में बढ़ती आतंकी गतिविधियों को देखते हुए ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार 5 जून, 1984 ई. को भारतीय सेना के द्वारा चलाया गया था. उस समय भिंडरावाले और उसके समर्थकों ने पंजाब के अमृतसर में स्वर्ण मंदिर पर कब्जा कर लिया था. 3 जून, 1984 को भारतीय सेना ने स्वर्ण मंदिर पर घेरा डालकर भिंडरावाले और उसके समर्थकों के विरुद्ध निर्णायक जंग लड़ने का निश्चय किया. हालात बिगड़ने और भिंडरावाले तथा समर्थकों द्वारा आत्मसमर्पण न किए जाने पर 5 जून, 1984 को भारतीय सेना ने स्वर्ण मंदिर में प्रवेश कर लिया. तब भिंडरावाले और उसके समर्थकों ने भारतीय सेना पर हमला कर दिया. भारतीय सेना ने भी जवाबी कार्यवाही की जिसमे में वह कामयाब रही.


ऑपरेशन ब्लू स्टार में कुल 136 सैनिक मारे गए जिसमें चार अफसर शामिल हैं. इसके आलावा 220 घायल हुए. मरने वाले आतंकवादियों और अन्य की संख्या 492 रही. परिसर से भारी पैमाने पर हथियार बरामद हुए. इसमें एंटी टैंक राकेट लांचर भी थे. सेना की इस कार्यवाही को “ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार” का नाम दिया गया. उस समय केंद्र में इंदिरा गांधी की सरकार थी इसलिए उनकी काफी आलोचना की गई. उस समय के राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह भी इंदिरा गांधी की इस कार्यवाही से नाराज थे. स्वर्ण मन्दिर पर हमले के प्रतिकार में पांच महीने के बाद ही 31 अक्टूबर 1984 को श्रीमती गांधी के आवास पर तैनात उनके दो सिक्ख अंगरक्षकों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी.



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