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समलैंगिक यौन संबंधों से कई कदम आगे हैं पश्चिमी देश

Posted On: 11 Dec, 2013 Others में

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एक तरफ जहां भारत में समलैंगिक यौन संबंध को गैरकानूनी बताया गया है और अपराध की श्रेणी में रखा गया है वहीं दूसरी तरफ धार्मिक संगठनों के भारी विरोध के बावजूद भी विश्व के अनेक देशों में खासकर पश्चिमी देशों में समलैंगिक यौन संबंधों को मान्यता दी गई है. इनमें से अधिकतर देश इससे भी आगे बढ़कर अप्राकृतिक विवाह को स्वीकृति दे चुके हैं.


same-sex-marriageस्त्री-पुरुष संबंध को जिस तरह प्राकृतिक माना जाता है, पुरुष-पुरुष या स्त्री-स्त्री संबंध को प्राकृतिक नहीं बल्कि विकृति माना जाता है. लेकिन पिछले एक दशक से इस विकृति को प्राकृतिक संबंध बताने की कोशिश की जा रही है.


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नीदरलैंड ऐसा पहला देश है जहां 12 साल पहले 2001 में समलैंगिक विवाह को मान्यता दी गई थी जिसके बाद अनेक देशों समलैंगिक विवाह को सही ठहराते हुए इसकी स्वीकृति दी. नीदरलैंड के बाद बै‌ल्जियम (2003), स्पेन (2005), कनाडा (2005), दक्षिण अफ्रीका (2006), नॉर्वे (2009), स्वीडन (2009), पुर्तगाल (2010), आईसलैंड (2010), अर्जेंटीना (2010), डेनमार्क (2012) उरुग्वे (2013), न्यूजीलैंड (2013) भी समलैंगिक विवाहों को मान्यता दे चुके हैं.


इसी साल अप्रैल महीने में यूरोपियन देश फ्रांस ने भी समलैंगिक विवाह को मंजूरी दे दी थी. इसके साथ ही फ्रांस दुनिया का 14वां ऐसा देश हो गया था, जहां समलैंगिक विवाह को मंजूरी प्राप्त है. 2012 में हुए अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में भी बराक ओबामा ने सार्वजनिक तौर पर समलैंगिक विवाह का समर्थन किया था. जबकि उनके विरोधी मिट रोमनी ने इसका विरोध किया. ओबामा से पहले सार्वजनिक तौर पर किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने समलैंगिक विवाह का समर्थन नहीं किया था. अमरीका के अलावा दशकों से समलैंगिक विवाह का विरोध करती आ रही ब्रिटिश सरकार खुद इस तरह की शादियों को कानूनी सहमति देने पर विचार कर रही है.


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