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लोकपाल का सफरनामा

Posted On: 18 Dec, 2013 Others में

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सालों से चले आ रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकपाल की लड़ाई आखिरकार अंतिम अंजाम तक पहुंच ही गई. 45 साल से लटका लोकपाल बिल आखिरकार संसद से पास हो गया है. राज्यसभा से पास होने के बाद बुधवार को इसे लोकसभा ने भी पास कर दिया है.  इससे पहले इस बिल को संसद में 12 बार बाहर का रास्ता दिखाया गया है.


lokpal bill  2लोकपाल का इतिहास

भ्रष्‍ट नेताओं और नौकरशाहों पर लगाम लगाने के लिए भारत में पहली बार लोकपाल बिल वरिष्ठ वकील शांति भूषण द्वारा 1968 में लया गया. शांति भूषण  ने ही पहली बार इसका ड्राफ्ट तैयार किया था जिसे 1969 में चौथी लोकसभा में पेश किया गया था. इसके बाद इसे 1971, 1977, 1985, 1989, 1996, 1998, 2001, 2005, 2008 में भी पेश किया गया था. इतनी बार लोकसभा में पेश होने के बावजूद यह राज्‍यसभा तक नहीं पहुंच सका.


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अप्रैल 2011 में जनलोपाल बिल को लेकर गांधीवादी अन्ना हजारे के नेतृत्व में एक बड़ा आंदोलन छेड़ा गया था. भारी दबाव के बाद वर्ष 2011 में लोकपाल एवं लोकायुक्त विधेयक लोकसभा में प्रस्तुत किया गया और इसे मंजूरी भी दी गई, लेकिन उस दौरान यह बिल राज्यसभा में पास नहीं हो सका था.


अन्ना का आंदोलन

संसदीय तानाशाही से मुक्ति के लिए भ्रष्टाचार को जरिया बनाकर अन्‍ना हजारे ने अप्रैल 2011 में दिल्ली के जंतर-मंतर से जनलोकपाल आंदोलन शुरू किया था. अगस्त तक आते इस आंदोलन ने विकराल रूप धारण कर लिया. आंदोलन को जनता का व्यापक समर्थन मिला. लोगों के अंदर अन्ना हजारे में उम्मीद की किरण दिखाई दी तो वे उनके पीछे एकजुट हो गए. उधर सरकार भी जनलोकपाल बिल के लिए अन्ना हजारे के अनशन करने की मांग को ब्लैकमेल बताती रही.


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भारी जनदबाव के कारण आखिरकार अगस्त के आखिरी में प्रधानमंत्री ने कहा, सरकार जन लोकपाल सहित अरुणा राय के विधेयक और सरकारी विधेयक पर सदन में चर्चा कराने के लिए तैयार है. भ्रष्टाचार के मसले पर लोकसभा में चर्चा की गई. प्रधानमंत्री नेता विपक्ष और लोकसभा अध्यक्ष सहित लोकसभा ने एक स्वर से अन्ना हजारे से अनशन खत्म करने की अपील की. इसके बाद केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकीमंत्री स्वर्गीय विलासराव देशमुख ने रामलीला मैदान जाकर अन्ना हजारे को सभी पार्टियों तथा संसद की ओर से भेजा गया पत्र दिया और उनसे अनशन समाप्त करने का आग्रह किया.


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ये तो महज ‘युवराज’ की ताजपोशी की कवायद है




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