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रास्ता रोकने का गुनाह और बदले में मिली मौत

Posted On: 2 Mar, 2014 social issues,Hindi News में

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अभी पिछले दिनों एक जोक पढ़ा था…


गाड़ी को ओवरटेक करने के चक्कर में राजू किसी के स्कूटर को टक्कर मार देता है. स्कूटर वाला राजू की गाड़ी रोकता है और उसे गुस्से में बाहर निकालता है. अमीर बाप का बिगड़ा हुआ बेटा राजू इस बात से आग बबूला हो जाता है और गाड़ी से निकलकर स्कूटर वाले को डायलॉग मारता है….तू जानता है मेरा बाप कौन है? इस पर स्कूटर वाला हंसते हुए बोलता है  क्यों तुझे नहीं पता?



ये डायलॉग सुनकर आसपास खड़े सभी लोग हंसने लगते हैं और राजू खिसियाकर वहां से ये कहते हुए चला जाता है कि जा देख लूंगा तुझे.

road rageये तो बस एक जोक था लेकिन जरा सोचिए कितना अच्छा हो कि रोड रेज के ऐसे मामले ऐसे ही हंसी-मजाक में हल हो जाएं और किसी को अपना या अपने बाप का नाम बताने के लिए ज्यादा मशक्कत ना करनी पड़े.



हाल ही में दो भाइयों को एक व्यक्ति ने सिर्फ इसलिए गोली मार दी क्योंकि पार्किंग से गाड़ी निकालते समय उन्होंने राहुल नाम के एक व्यक्ति की गाड़ी के आगे जाने का रास्ता रोक दिया था. जरा सी बात को प्यार से सुलझाया जा सकता था लेकिन बात खत्म करने की जगह राहुल ने दोनों भाइयों पर गोलियों की बरसात कर दी और वहां से भाग गया.





क्या आप जानबूझ कर अपना अंग कटवाना चाहेंगे !


रोड रेज की ऐसी वारदातें अकसर सुनाई देती रहती हैं. पेशेंस की कमी के चलते लोग ऐसी दुखद घटनाओं को अंजाम दे देते हैं तो कुछ इस भागती-दौड़ती दुनिया में सबसे आगे रहने के लिए और स्पीड के लालच में रुकना नहीं चाहते और कोई उनके रास्ते में आ जाए तो बस या तो उस पर लात-घूंसों की बारिश हो जाती है और अगर साथ में कोई हथियार रखने की आदत हो या हथियार पड़ा हो तो उसका प्रयोग भी लगे हाथ कर ही लिया जाता है.


विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे अर्थव्यस्था में बढ़ोत्तरी होती है वैसे-वैसे लोगों में पेशेंस की कमी आने लगती है, जिसके परिणामस्वरूप रोडरेज की वारदात बड़े पैमाने पर घटित होती हैं. मनोवैज्ञानिकों की मानें तो रोड रेज वास्तव में इंटरमिटेंट एक्सप्लोसिव डिसऑर्डर (आईईडी) है और यह एक गंभीर बायोकैमिकल प्रॉब्लम है. मनोविकार का मुख्य कारण मस्तिष्क के रसायनों में असंतुलन होना है। हालांकि यह असंतुलन कुछ ही देर के लिए होता है, लेकिन इससे व्यक्ति हिंसक हो उठता है.


ड्राइविंग करते समय सिर्फ जान से मार देना या जान से मारने की धमकी देना ही रोड रेज की श्रेणी में नहीं आता. सामान्य तौर पर रोडरेज की घटनाओं को निम्नलिखित बिन्दुओं के तहत समझा जा सकता है:


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1. बहुत कम फासला रखते हुए किसी गाड़ी के पीछे चलने आदि के साथ आक्रामक ड्राइविंग.

2. दूसरों को एक गली में से नहीं निकलने देना या जानबूझकर किसी को साथ-साथ चलने से रोकना.

3. वाहन के हार्न को डरावनी या धमकी भरी धुनों में बजाना.

4. चिल्लाना या सड़क के किनारे प्रतिष्ठानों में विघटनकारी व्यवहार का प्रदर्शन.

5. रोड पर चल रही अन्य गाड़ियों के ड्राइवर को डराने के लिए उच्च गति पर ड्राइविंग.

6. अशिष्ट इशारे.

7. मौखिक गाली या धमकी देना.

8. जानबूझकर वाहनों के बीच टकराव पैदा करना और अन्य वाहनों को टक्कर मारना.

9. मुकाबला शुरू करने का प्रयास करने के लिए कार को आगे निकालना, जिसमें अन्य वाहनों का किसी वस्तु के साथ टकराव भी शामिल है.

10. बन्दूक या अन्य घातक हथियार के उपयोग की धमकी.


भारत में आए दिन रोड रेज की वारदातें होती रहती हैं लेकिन अब जब हम ये बात जानते ही हैं कि यहां बाप बड़ा ना भैया, सबसे बड़ा रुपैया तो ऐसे में जिसकी जेब में पैसा होता है आमतौर पर कानून और न्याय भी उसी की जागीर गिनी जाती है. इसलिए किसको सजा मिलती है किसे बख्श दिया जाता है इस बारे में तो बात ना ही करें तो अच्छा है. हम तो बस ये कह सकते हैं अगली बार जब घर से बाहर निकलें तो अच्छी खासी चंपी करवाकर निकलिएगा ताकि आपका दिमाग शांत रहे. वो क्या है ना, ये आपके और सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों के लिए बहुत जरूरी है.



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Web Title : consequences of road rage



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