blogid : 314 postid : 840949

विमान बनाने वाले इस भारतीय वैज्ञानिक ने उठाया ये क्रांतिकारी कदम

Posted On: 23 Jan, 2015 Hindi News में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

कभी डॉक्टर अब्दुल कलाम के साथ काम करने वाला ये भूतपूर्व वैज्ञानिक आज किसी और कारण से सुर्खियों में है. हल्के प्रतिरोधक विमान के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले ये वैज्ञानिक डीआरडीओ में 35 वर्षों तक काम कर चुके हैं.




manas bihari




डॉक्टर मानस बिहारी वर्मा वर्ष 2005 में सेवानिवृत्ति के बाद बिहार के दरभंगा में अपने घर वापस लौट आए. इसके पीछे उनका मकसद समाज की सेवा करने का था. उन्होंने यह तय किया था कि वो समाज को वही देंगे जो उन्होंने अपने इतने वर्षों की सेवा में अर्जित की है यानी विज्ञान संबंधी ज्ञान. इसके लिए वो 90 के दशक में डॉक्टर अब्दुल कलाम द्वारा शुरू किये गए ‘विकसित भारत फाउंडेशन’ से जुड़ गए.




Read: एपीजे अब्दुल कलाम: वह मानने थे “कुछ चीजें नहीं बदल सकतीं”





डॉक्टर वर्मा पिछले छह-सात वर्षों से दरभंगा, मधुबनी और सुपौल के गरीब दलित बच्चों को विज्ञान संबंधी शिक्षा देने के काम से जुड़े हैं. इस पहल की विशेषता यह है कि इसके द्वारा छठी से बारहवीं तक के बच्चों को जरूरी परीक्षणों की व्यवहारिक जानकारी आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित मोबाइल प्रयोगशाला के जरिये दिया जा रहा है. डॉक्टर वर्मा बताते हैं कि, ‘फिलहाल वो तीन मोबाइल वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं और छह प्रशिक्षकों की मदद से स्कूली बच्चों को वैज्ञानिक शिक्षा दे रहे हैं.’ इन प्रशिक्षकों को आंध्र-प्रदेश के अगस्त्य इंटरनेशनल फाउंडेशन में प्रशिक्षण दिया गया है.





aircraft




इस मोबाइल प्रयोगशाला की शुरूआत से अब तक डॉक्टर वर्मा दरभंगा, मधुबनी और सुपौल के अब तक 250 विद्यालय और 12,000 विद्यार्थियों को शिक्षित कर चुके हैं. डॉक्टर वर्मा यह कहते हैं कि, ‘सुदूर गाँवों के कई विद्यालयों ने इस मोबाइल प्रयोगशाला को अपने यहाँ मँगवाकर और बच्चों को इसके द्वारा शिक्षित करने में रूचि दिखाई है. इस प्रयोगशाला ने स्कूल में बच्चों की उपस्थिति को व्यापक रूप से प्रभावित किया है और इसमें करीब 70 से 80 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है.’




Read: ख्वाबों की एक अनोखी उड़ान: एपीजे अब्दुल कलाम





लेकिन बच्चों और विशेष रूप से दलित बच्चों को इस मोबाइल प्रयोगशाला के जरिये शिक्षित करने के उनके इस प्रयास पर बिहार सरकार उदासीन रवैया अपना रही है. यह कार्यक्रम अब भी डॉक्टर अब्दुल कलाम की आर्थिक मदद से चल रही है. वर्ष 2012 में डॉक्टर कलाम को सीताराम जिंदल पुरस्कार की राशि के रूप में 1 करोड़ रूपए मिले जिसका एक हिस्सा उन्होंने इस कार्यक्रम को सुचारू रूप से चलाने के लिए दे दिया. मोबाइल प्रयोशालाओं की सहायता से गरीब बच्चों को बिहार के सुदूर देहात क्षेत्र में शिक्षित करना एक क्रांतिकारी कदम है जिससे शिक्षित और तार्किक समाज का निर्माण संभव हो पायेगा. Next….








Read more:

चेंज योर सिग्नेचर! आपकी तकदीर बदल जाएगी

मौलाना अबुल कलाम आजाद: नहीं भुला सकते ‘आजाद’ का यह योगदान

मंगलयान मिशन के नायक: इन वैज्ञानिकों ने विश्व में भारत को किया गौरवान्वित









Tags:                                                   

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran