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संयोग मगर सच! ए पी जे अब्दुल कलाम और स्वामी विवेकानंद की ये समानतायें

Posted On: 28 Jul, 2015 Hindi News में

Mukesh Kumar

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कम ही लोग होते हैं जो धरातल से उठ नभ की ऊँचाई नाप लेते हैं पर उन लोगों की संख्या बेहद कम होती है जो नभ की ऊँचाई नाप लेने के बाद भी जमीन से टिके रहते हैं.



Dr. Abdul kalam


ज्यादा दिन नहीं हुए जब हम झारखंड की शिक्षा मंत्री को उनके वाहियात कृत्य के लिये कोस रहे थे. तब शायद किसी को अंदाजा भी नहीं होगा कि हम सचमुच अपने उस लाल को खोने जा रहे हैं जिसे दुनिया भारत के मिसाइल मैन के नाम से जानती है. यह संयोग बेहद दुखद है जब किसी राज्य की शिक्षा मंत्री जीवित व्यक्ति के चित्र पर हार पहना दे और उसके कुछ दिनों बाद ही उस व्यक्ति का निधन हो जाये!


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तेज उदारीकरण के दौर में मध्य वर्ग के उभार के साथ ही उसे एक ऐसे आदर्श की जरूरत महसूस हुई जो उसे सपने दिखा सके. मध्यवर्ग का यह आदर्श बने डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम. एक वैज्ञानिक, राष्ट्रपति और उन सबसे बढ़ कर एक ज़िंदादिल नेक इंसान अब्दुल कलाम ने मध्य वर्ग को उसके सपनों के साथ जीना सिखाया. लेकिन कल उस मनहूस घड़ी में उन्होंने इहलोक को अलविदा कह दिया. उनका शरीर उस धरा में विलीन हो जयेगा जिससे उठ उन्होंने नभ की ऊँचाई नापी थी.


abdul kalaam


अलग-अलग शताब्दियों में पैदा होने के बावजूद स्वर्गीय डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम और स्वाम विवेकानंद के बीच कुछ समानतायें थी. ये समानतायें केवल संयोग ही कही जा सकती है. फिर भी ये इन्हें विशिष्ट बनाती है.


अंतिम सार्वजनिक संबोधन

यह संयोग ही है कि स्वामी विवेकानंद ने अपना अंतिम सार्वजनिक संबोधन मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में दिया. वहीं स्वर्गीय डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम शिलॉन्ग अवस्थित भारतीय प्रबंध संस्थान में अंतिम व्याख्यान देने पहुँचे थे. यहाँ उन्हें दिल का दौरा पड़ा और कुछ ही घंटों में उनकी साँसों ने उनके दिल का साथ छोड़ दिया.


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निधन का महीना

यह भी संयोग ही है कि स्वामी विवेकानंद और स्वर्गीय अब्दुल कलाम के निधन का महीना भी जुलाई ही है. “पीपल्स प्रेसिडेंट” के नाम से मशहूर अब्दुल कलाम के निधन की तारीख़ 27 जुलाई 2015 है, वहीं स्वामी विवेकानंद ने 04 जुलाई 1902 को प्राण त्याग दिये थे.


संयोग चाहे कुछ भी हो पर सच्चाई यही है कि भारतवासियों ने अपने उस लाल को खो दिया है जिसने कक्षा में पिछली बेंचों पर बैठे छात्रों की ब्रेन के बेस्ट होने की सम्भावना व्यक्त की. धरती तो सचमुच कल हिली जब एक बड़ा वृक्ष धड़कनों की उपेक्षा से गिर पड़ा. उस वृक्ष के गिरने से बड़े बाल रखने वाले छात्रों का वो जीवंत बहाना भी कहीं गुम हो गया जो वे बाल नहीं कटवाने के लिये बहाया करते थे.Next….

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