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पेट के लिए राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी को लगाना पड़ रहा है ठेला

Posted On: 30 Sep, 2015 Others में

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हां यह खबर नई नहीं है. नया है तो सिर्फ खिलाड़ी का नाम और स्थान. इससे पहले भी आपने देश के कई खिलाड़ियों की बदहाल हालत और विपरीत परिस्थितियों से लड़ने की खबर पढ़ी होगी. बहरहाल यह खबर है एक राष्ट्रीय स्तर की महिला पहलवान की जो कुश्ती लड़ने के साथ ही अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए ठेले पर पोहा बेचती है. हालात इतने खराब हैं कि वह अपनी पूरी डाइट भी नहीं ले पाती लेकिन कुश्ती के लिए जुनून ऐसा कि आधी डाइट मिलते रहने के बावजूद कुश्ती लड़ना नहीं छोड़ती.


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इस खिलाड़ी का नाम है शारदा यादव. इस पहलवान ने 2013 में जूनियर और 2014 में सीनियर लेवल की नेशनल चैम्पियनशिप में भाग लिया था. अगले महीने भोपाल में नेशनल स्कूल गेम्स होने वाले हैं जिसमें वह छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेगी लेकिन राज्य के खेल मंत्री को जब इस खिलाड़ी के बारे में बताया गया तो उनका जवाब बेहद उदासीन रहा. उन्होंने कहा कि “भेज दो तो मदद कर देंगे.”


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छुटपन में ही पिता की मौत हो जाने के बाद उसने घर चलाने की जिम्मेवारी अपने कंधों पर ले लिया. उसने मां के साथ दूसरे घरों में काम करके कुछ पैसा इकट्ठा किया और फिर पोहे का ठेला लगाना शुरू कर दिया. शारदा ने न सिर्फ अपनी बल्कि अपनी बहनों की जिम्मेदजारी भी उठाई. अपनी पांच बहनों में से तीन बड़ी बहनों की शादी उसने अपने बूते पर करवाया.


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हर खिलाड़ी का सपना होता है कि वह ओलंपिक खेलों में देश के लिए मेडल जीते. शारदा का भी यह सपना है. उसकी कोच लीना यादव कहती हैं कि शारदा एक बेहतरीन प्लेयर है और उसमें काफी पोटेंशियल है. वे उसे इंटरनेशनल खिलाड़ी बनाने की ख्वाहिश रखती हैं लेकिन छत्तीसगढ़ के स्पोर्ट्स मिनिस्टर भैयालाल राजवाड़े शारदा की आर्थिक हालत के सवाल पर झल्लाते हुए कहते हैं कि “प्रदेश में और भी खेल और काम हैं, किसी एक खेल या खिलाड़ी पर ध्यान नहीं दिया जा सकता. जिस शारदा की आप बात कर रहे हैं, उसे मेरे पास भेज दीजिए. मदद मिल जाएगी.”


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मंत्रीजी आप ठीक कह रहे हैं. आपको और भी खेल और खिलाड़ियों पर ध्यान देना है लेकिन इस सवाल का जवाब कौन देगा कि आपके राज्य में किसी खेल या खिलाड़ी की ऐसी बदहाल स्थिती क्यों है. शारदा की कोच लीना यादव के मुताबिक राज्य में कुश्ती के खिलाड़ियों को डाइट मनी तक नहीं मिलती, इक्विपमेंट तो बाद की बात है. शारदा रोजाना चार घंटे प्रैक्टिस करती हैं और इससे पहले वे उसे घर और ठेले का काम भी पूरा करती हैं. लेकिन इतनी मेहनत के बाद भी उन्हें प्रॉपर डाइट लिए बिना प्रेक्टिस करना पड़ता है. किसी खिलाड़ी की प्रतिभा पूरी तरह उभरने से पहले ही नष्ट हो रही हो तो इसका जवाब खेलमंत्री से न मांगा जाए तो किससे मांगा जाए. Next…


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