blogid : 314 postid : 1109640

नहीं होगी गोहत्या, यहां की प्रयोगशाला में उगाया जाएगा गोमांस!

Posted On: 20 Oct, 2015 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

अगर सबकुछ डच वैज्ञानिकों के इस टीम के अनुसार हुआ तो गोहत्या का विवाद सदा-सदा के लिए समाप्त हो सकता है. ऐसा नहीं कि लोग गोमांस खाना छोड़ देंगे, बल्कि गोमांस तब प्रयोगशालाओं में बनने लगेंगे. डच वैज्ञानिकों की एक टीम का दावा है कि पांच साल के भीतर लैब में विकसित किए गए मीट बर्गर बाजार में उपलब्ध होने लगेंगे. वैज्ञानिकों के इस टीम ने दुनिया के सबसे पहले लैब में विकसित किया हुआ मीट बर्गर तैयार किया है, जिसकी कीमत 2,15,000 पाउंड यानी 2 करोड़ 16 लाख से अधिक है.


386680-cultured-beef-first-lab-grown-burger


शोधकर्ता अब एक कंपनी स्थापित करने जा रहे हैं जो कि लैब में विकसित मीट बर्गर को और अधिक स्वादिष्ट और सस्ता करने के ऊपर काम करेगी. इस नए फर्म के प्रमुख पीटर वर्सटेट का कहना है कि यह उत्पाद मीट के बढ़ते मांग की पूर्ति करने का काम करेगा. सबसे पहले यह उत्पाद नीदरलैंड के वैज्ञानिक प्रो. मार्क पोस्ट द्वारा तैयार किया गया था.


Read: इस खबर को पढ़ने के बाद अगली बार से बर्गर नहीं खाएंगे आप


वैज्ञानिकों ने दो साल पहले लंदन में इस बर्गर का एक प्रोटोटाईप बनाकर खाया था. इसकी कीमत 2 लाख 15 हजार पाउंड पड़ी थी. पीटर वर्सटेट ने कहा कि, “हमें विश्वास है कि 5 साल के अंदर हम इसे बाजार में उतार देंगे.” उनका कहना है कि जल्द ही यह उत्पाद सुपरमार्केट में उपलब्ध होगा लेकिन इसके लिए इसकी कीमत कम करनी होगी ताकि इसकी मांग बढ़ सके.


Beefburger1


यह बर्गर स्टेम कोशिकाओं द्वारा तैयार किया जाता है. शोधकर्ता मीट की बढ़ती मांग को पूरा करने के तरीके खोजने में लगे हैं. पारंपरिक कृषि के तरीकों द्वारा ऐसा करने में ज्यादा उर्जा, पानी और भूमि की आवश्यकता होती है. साथ ही इस तरह से ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन भी अधिक होता है.


Read: एक बच्चे की हंसी ने डॉक्टरों को भी चौंका दिया, क्या था इस खौफनाक हंसी के पीछे का सच


इस बर्गर को तैयार करने के लिए गाय के मांसपेशियों से स्टेम कोशिकाओं के उत्तक (टीश्यू) निकाला जाता है. इन्हें फिर प्रयोगशाला में पोषक तत्वों और ग्रोथ-प्रमोटिंग केमिकल्स की मदद से विकसित और मल्टीप्लाई किया जाता है. तीन हफ्तों के अंदर कई लाख स्टेम सेल विकसित हो जाते हैं. ये जुड़कर मांसपेशियों के छोटे-छोटे टुकड़ों में तब्दील हो जाते हैं जो कि करीब एक सेंटीमीटर लंबे और कुछ मिलीमीटर मोटे होते हैं. मांस के इन टुकड़ों को एक साथ जोड़कर इसे रंग दिया जाता है और फैट के साथ मिलाया जाता है. इस तरह से बिना गाय को मारे प्रयोगशाला में ही गोमांस तैयार हो जाता है. Next…


Read more:

बर्गर खाने के चक्कर में कहीं आप मानव मांस तो नहीं खा रहे, यह दिल दहला देने वाली खबर आपकी आंखें खोल देगी

अब मिक्सर में बनाइए शराब और प्रिंटर में प्रिंट कीजिए बर्गर

कमसिन लड़कियों की टोली ने अपने पैर किराए पर दे दिए, लेकिन कैसे, यह और भी मजेदार है




Tags:             

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran