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शव को 12 किलोमीटर तक उठाकर ले जाना पड़ा इस पति को, शर्मसार कर देगी वजह

Posted On: 25 Aug, 2016 Hindi News में

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‘जीते जी किसी का साथ न मिला, मरने पर उमड़ पड़ा हुजूम.’ इस छोटी-सी लाइन में जिंदगी की पूरी सच्चाई समाई है. किसी ने सही ही कहा है जिंदा रहने पर दुनिया किसी को एक रोटी के लिए भी नहीं पूछती और उसी व्यक्ति के मरने के बाद बड़े-बड़े भोज किए जाते हैं, लेकिन इस कड़वी सच्चाई से परे एक सच्ची घटना ऐसी है, जिसे सुनकर किसी का दिल भी रो पड़ेगा. ओडिशा के कालाहांडी से एक ऐसी खबर आई है, जिसे सुनकर हम सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि हम किस समाज में रह रहे हैं.


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दरअसल, एक व्यक्ति की पत्नी की मौत हो गई थी. उसने अपनी पत्नी का शव ले जाने के लिए अस्पताल से वाहन की व्यवस्था करने के लिए कहा, लेकिन पैसे न होने की वजह से अस्पताल ने उसे वाहन देने से साफ इंकार कर दिया, जिसकी वजह से कोई दूसरा विकल्प न देखते हुए उस आदमी को अपनी पत्नी का शव अपने कंधे पर उठाकर 12 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा. एक अंग्रेजी अखबार की खबर के मुताबिक दाना माझी बीते बुधवार को अपनी पत्नी के शव को भवानीपुरा टाउन के अस्पताल से चादर में लपेटकर 60 किलोमीटर दूर कालाहांडी के मेलघर स्थित अपने गांव के लिए निकल पड़े.



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उनके साथ उनकी बेटी भी थी. उल्लेखनीय है कि माझी की पत्नी टीबी की मरीज थी. पैसों की वजह से माझी उनका ईलाज नहीं करवा पाये. पत्नी की मौत के बाद वाहन की व्यवस्था न होने पर माझी जब अपने कंधे पर उठाकर शव ले जाने लगे, तो आसपास के युवाओं ने ये दिल दहला देने वाली घटना देखकर स्थानीय प्रशासन को खबर दी, जिसके बाद आनन-फानन में प्रशासन के जोर पर अस्पताल वालों ने शव ले जाने के लिए वाहन की व्यवस्था की.




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इस बारे में माझी का कहना था कि ‘मैंने काफी देर तक अस्पताल प्रशासन से वाहन की व्यवस्था करने को कहा लेकिन किसी ने भी मेरी बातों को गंभीरता से नहीं लिया, इसलिए मुझे हार मानकर ये कदम उठाना पड़ा. दूसरी तरफ अस्पताल प्रशासन ने अपना बचाव करते हुए कहा एम्बुलेंस आने में थोड़ी देर हो गई थी, लेकिन माझी ने थोड़ा भी इंतजार नहीं किया. बहरहाल, इस घटना ने एक बार फिर से समाज को एक बार फिर से कठघरे में खड़ा कर दिया है…Next




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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

NirajKumar के द्वारा
August 25, 2016

यही हमारे देश की तस्वीर है जो हम देख रहे है जब की लोग कहते है की भारत बदल रहा है इन्सानियत को शर्मसार करने वाली घटना है ऐसे अस्पतालों के खिलाफ सख्त करवाई करनी चाहिए.

Puja के द्वारा
August 25, 2016

Insaniyat ko sarmsar kr dene wali ye ghatna to hai hi saath hi daat deni padegi us mahaan saksh ki himmat ko jisme pic click krne ki himmat to thi pr itni insaniyat nhi thi ki us insan ki help kr de…hm khud ko to badal nhi paate h or baat krte h dunia badalne ki…


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