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जिस ICJ में दलवीर भंडारी की जीत की मना रहे खुशी, जानें क्‍या है उसका काम

Posted On: 21 Nov, 2017 Hindi News में

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नीदरलैंड के हेग स्थ‍ित अंतरराष्ट्रीय अदालत (ICJ) में भारतीय जज दलवीर भंडारी जज चुन लिए गए हैं। वे दूसरी बार ICJ के जज बने हैं। उनका सीधा मुकाबला ब्रिटेन के उम्मीदवार जस्टिस क्रिस्टोफर ग्रीनवुड से था। वर्ष 1946 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है, जब ICJ में ब्रिटेन का कोई जज नहीं है। जस्टिस भंडारी ने पाकिस्तान में बंद भारत के कुलभूषण जाधव मामले में भी अहम भूमिका निभाई थी। दलवीर भंडारी की जीत के बाद भारत सहित दुनिया भर में रह रहे भारतीय और उनके चाहने वाले खुशी मना रहे हैं। मगर क्‍या आपने सोचा कि जिस ICJ में जस्टिस भंडारी की जीत की खुशी मना रहे हैं, उस अदालत का काम क्‍या है। आइये आपको बताते हैं कि क्‍या काम करता है ICJ


justice bhandari


1945 में हुई थी स्थापना

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस यानी ICJ यूनाइटेड नेशन का महत्वपूर्ण न्यायिक अंग है। सन् 1945 में हॉलैंड के हेग शहर में इसकी स्थापना हुई थी। 1946 से इसने काम करना शुरू कर दिया था। ICJ में 15 जज होते हैं, जो संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद द्वारा चुने जाते हैं। इनका कार्यकाल 9 साल है। ICJ की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी और फ्रेंच है।


ICJ


विश्‍व न्‍यायालय के रूप में करता है काम

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस विश्व न्यायालय के रूप में काम करता है। ICJ की वेबसाइट के अनुसार इसका काम कानूनी विवादों का निपटारा करना और अधिकृत संयुक्त राष्ट्र के अंगों व विशेष एजेंसियों द्वारा उठाए कानूनी प्रश्नों पर राय देना है। यानी इसके दो मुख्‍य कर्तव्य हैं। पहला अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार यह कानूनी विवादों पर निर्णय लेता है, दो पक्षों के बीच विवाद पर फैसले सुनाता है और दूसरा संयुक्त राष्ट्र की इकाइयों के अनुरोध पर राय देता है। कोई भी सदस्‍य देश अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। मौजूदा समय में इसके सदस्‍य देशों की संख्‍या 192 है।


Dalveer bandari


कौन हैं जस्टिस भंडारी

1 अक्टूबर 1947 को राजस्थान के जोधपुर में जन्‍मे दलवीर भंडारी भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश रह चुके हैं। इनके पिता और दादा राजस्थान बार एसोसिएशन के सदस्य थे। जोधपुर विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्‍होंने राजस्थान हाईकोर्ट में वकालत की। अमेरिका के शिकागो स्थित नाॅर्थ वेस्टर्न विश्वविद्यालय से कानून में मास्टर्स की डिग्री भी हासिल की है। अक्टूबर 2005 में मुंबई हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। इनके दिए फैसलों की बदौलत ही देश में गरीबों के लिए रैन बसेरे बनाए गए थे। इसके अलावा इनके ऐतिहासिक फैसलों में हिंदू विवाह कानून 1955, बच्चों को अनिवार्य और निशुल्क शिक्षा का अधिकार, गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों को सरकारी राशन बढ़ाने आदि प्रमुख हैं…Next


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